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साइबर सुरक्षित: देशव्यापी खतरा बनता डिजिटल अरेस्ट, ऐसे बचें और यहां करें रिपोर्ट!

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सिर्फ दो ट्रांजैक्शन में गुरुग्राम की एक घटना में एक महिला को 5.85 करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान हुआ। इससे पहले चंडीगढ़ की एक घटना में स्कैमर्स ने एक महिला को डराया कि उनका आधार एक ड्रग पार्सल से जुड़ा है और फिर उनसे ‘जमानत’ के नाम पर 11 लाख रुपये ठग लिए। मैसूर में दो बुजुर्गों को नकली एनआईए अधिकारी बनकर कॉल किया और उनसे 1.92 करोड़ रुपये लूट लिए।

हैदराबाद की एक घटना में एक रिटायर्ड कर्मचारी ने ‘गिरफ्तारी’ के डर से 49 लाख रुपये इन धोखेबाजों को ट्रांसफर कर दिए।

गुरुग्राम, मैसूर, हैदराबाद, चंडीगढ़ की ये घटनाएं बताती हैं कि डिजिटल अरेस्ट अब कोई छिटपुट घटना नहीं, बल्कि राष्ट्रव्यापी समस्या बन गए हैं। न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके दायरे में कोई एक शहर नहीं, बल्कि पूरा देश है और यही वजह है कि इस खतरे को ‘राष्ट्रीय खतरा’ की तरह देखा जा रहा है।

डिजिटल फ्रॉड और स्कैम के पुराने तरीकों यानी ओल्ड स्कूल फ्रॉड में जहां अपेक्षाकृत कम डिजिटली साक्षर और बुजुर्गों को निशाना बनाया जाता था, वहीं डिजिटल अरेस्ट का शिकार शहरों में रहने वाले और अपेक्षाकृत पढ़े-लिखे, प्रोफेशनल लोग हो रहे हैं!

मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देशवासियों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर हो रही धोखाधड़ी के प्रति जागरूकता वाले संबोधन को गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स पोस्ट के जरिए शेयर करते हुए यह बताया कि पुलिस, CBI, नारकोटिक्स या RBI समेत कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से जांच नहीं करती है। 

मार्च 2024 में राज्यसभा को दी गई जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2024 में डिजिटल अरेस्ट और संबंधित साइबर क्राइम्स के कुल 123 672 मामले सामने आए, जिसमें नुकसान की रकम करीब दो हजार करोड़ रुपये रही। 2023 के मुकाबले यह करीब छह गुणा अधिक है, जब ऐसे मामलों की संख्या महज 60,676 थी और इसमें हुए नुकसान की रकम मात्र 339 करोड़ रुपये।

वहीं, 2025 के पहले तीन महीनों में ऐसे मामलों की संख्या 17,718 दर्ज की गई है और इसमें शामिल नुकसान की रकम 200 करोड़ रुपये से अधिक है।

क्या होता है ‘डिजिटल अरेस्ट’?

सवाल कि क्या भारत के कानून में किसी को डिजिटली अरेस्ट करने का प्रावधान है?

जवाब है नहीं! भारत का कानून किसी को डिजिटली अरेस्ट करने की अनुमति नहीं देता, क्योंकि भारत के कानून में ऐसी किसी हिरासत या गिरफ्तारी का कोई प्रावधान ही नहीं है।

भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार, ‘पुलिस’ और ‘कानून व्यवस्था’ राज्य के विषय हैं। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश अपनी लॉ इन्फोर्समेंट (एलईए) एजेंसियों के माध्यम से साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट स्कैम्स सहित अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच और अभियोजन के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। यहां पर केंद्र सरकार की भूमिका राज्यों को डिजिटल अरेस्ट समेत साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित तरीके से निपटने के मैकेनिजम्म को मजबूत करने की दिशा में सहयोग देने की होती है।

क्या होता है तरीका?

यह अब तक सामने आए मामलों के आधार पर है और जरूरी नहीं कि हर मामले में ऐसा ही हो। स्कैमर्स या ठगी करने वाले धोखाधड़ी के नए तरीके ढूंढते रहते हैं और वह इन बताए गए तरीकों से अलग भी हो सकता है।

तो अब बात कि इस फेक क्राइम से बचा कैसे जाए?

अभी तक सामने आई घटनाओं की एनालिसिस के आधार पर कोई फोन या वीडियो कॉल डिजिटल अरेस्ट स्कैम हो सकता है!

अगर, कॉल करने वाला व्यक्ति खुद को सरकारी या किसी लॉ इन्फोर्समेंट एजेंसी पुलिस, ईडी, सीबीआई का अधिकारी बताते हुए बातचीत की शुरुआत करें!

इसके बाद वह मनी लॉन्ड्रिंग, साइबर क्राइम, इलीगल इंटरनेशनल ट्रांसफर्स, ड्रग स्मगलिंग जैसी घटनाओं में आपकी संलिप्तता बताते हुए आपको अरेस्ट करने की धमकी दे।

बातचीत के दौरान आपको एफआईआर की कॉपी, पुलिस की आईडी, लीगल नोटिस या फिर डीपफेक वीडियो दिखाए, जिस पर यकीन करना आसान हो। और फिर इसके बाद मुकदमे या गिरफ्तारी से बचने के लिए आपसे पैसे की मांग करें! और पैसा मिलते ही गायब हो जाए!

सावधानी ही बचाव है!

इसलिए जब कोई आपको इस तरह से ट्रैप करने की कोशिश करे तो इन बातों का ध्यान रखें।

तुरंत डिस्कनेक्ट करें: ज्यादा बात करेंगे तो वे आपको ट्रैप कर लेंगे।

पैसे बिल्कुल न भेजें: चाहे वे कितनी भी धमकियां दें, एक भी रुपया ट्रांसफर न करें।

सबूत जमा करें: कॉल वाले नंबर, मैसेज या वीडियो का स्क्रीनशॉट लेने की कोशिश करें।

शिकायत करें: तुरंत 1930 (साइबर क्राइम हेल्पलाइन) पर कॉल करें और नजदीकी साइबर पुलिस को बताएं।

बैंक को बताएं: अगर आपने कोई बैंक डिटेल दे दी है, तो फौरन अपने बैंक को कॉल करके खाता फ्री (अस्थायी रूप से बंद) कराएं।

कहां करें शिकायत?

नेशनल सायबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर घटना को रिपोर्ट करें। सायबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर घटना की जानकारी दें। यह 24X7 करने वाली हेल्पलाइन है।

इसके बाद नजदीकी सायबर पुलिस स्टेशन में जाकर मामला दर्ज कराएं।

बैंकिंग धोखाधड़ी, फ्रॉड, स्कैम से संबंधित घटनाओं और इससे बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक बने रहने के लिए आरबीआई, सेबी समेत अन्य नियामकीय संस्थाओं के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को जरूर फॉलो करें।

डिस्क्लेमर: यह लेख वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Fraud) के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सरकारी संस्थाओं, बैंकों, अन्य आधिकारिक स्रोतों और विभिन्न न्यूज़ रिपोर्ट्स पर आधारित है। यह केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है।

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