नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। नेपाल के मधेश इलाके में जुलाई 2026 के अंत में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद सोशल मीडिया पर दो वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें से एक में मुस्लिम लोगों के साथ मारपीट करते हुए लोग और दूसरे में एक भवन से बाहर निकल रहे लोगों पर लाठी चलाते पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं। इन दोनों वीडियो को शेयर कर कुछ यूजर्स दावा कर रहे हैं कि नेपाल में लोग और पुलिसवाले मुसलमानों को पीट रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने दोनों वीडियो की जांच की तो पता चला कि इन्हें भ्रामक दावों के साथ शेयर किया जा रहा है। दरअसल, पहला वीडियो बांग्लादेश का है, जहां जुलाई 2026 में एक मार्च निकाल रहे जमात-ए-इस्लामी के लोगों पर हमला होने का आरोप लगाया गया था। वहीं, लोगों पर लाठी चलाते पुलिसकर्मी का वीडियो भारत के कर्नाटक का मार्च 2020 का है। उस समय कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।
क्या है वायरल पोस्ट?
एक्स यूजर ‘HinduNation__’ ने 4 अगस्त 2026 को एक वीडियो पोस्ट (आर्काइव लिंक) करते हुए नेपाल में मुसलमानों के साथ मारपीट होने का दावा किया।
इंस्टाग्राम यूजर ‘iindian_affairs’ ने 6 अगस्त 2026 को एक अन्य वीडियो शेयर (आर्काइव लिंक) करते हुए लिखा, “पुलिस के मना करने के बावजूद भी मुसलमान ने मस्जिद में जबरदस्ती घुसकर नमाज पढ़ने की कोशिश की फिर पुलिस ने कुछ अलग ही बर्ताव दिखाए आप लोग पूरा वीडियो दिखाओ वीडियो ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि सभी लोग देख सके भारत Location: Siraha, Nepal A”

पड़ताल
हमने दोनों दावों को एक-एक करके चेक किया।
पहला वीडियो
इस वीडियो का कीफ्रेम निकालकर हमने उसे गूगल लेंस से सर्च किया, तो पता चला कि ‘Al Madina TV‘ नाम के फेसबुक यूजर ने 4 जुलाई 2026 को एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें वायरल क्लिप को देखा जा सकता है। इसके अनुसार, ”गुलिस्तान में जमात के मार्च पर हमला किया गया।”

इस आधार पर हमने कीवर्ड सर्च किया, तो हमें बांग्लादेश के न्यूज पोर्टल ‘चैनल वन न्यूज’ के यूट्यूब चैनल पर 4 जुलाई 2026 को अपलोड की गई एक वीडियो न्यूज मिली। इसके अनुसार, ”गुलिस्तान में जबरन वसूली के विरोध में जमात के जुलूस पर हमले का आरोप लगा है।” (गूगल ट्रांसलेट से अनुवाद)
फेसबुक यूजर ‘Al Madina TV’ और ‘चैनल वन न्यूज’ के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो न्यूज में समान व्यक्ति देखे जा सकते हैं। इससे पता चलता है कि यूट्यूब चैनल पर अपलोड किए गए वीडियो न्यूज में इसी घटना की दूसरी क्लिप का इस्तेमाल किया गया है।

‘ढाका टाइम्स 24’ की वेबसाइट पर 4 जुलाई 2026 को प्रकाशित खबर के मुताबिक, गुलिस्तान में जबरन वसूली और कब्जे के विरोध में मार्च निकाल रहे बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी पर हमले के आरोप लगे हैं। आरोप है कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के लोगों ने इस मार्च पर हमला किया।

इस बारे में हमने बांग्लादेश में ‘प्रोबश टाइम्स’ के समाचार संपादक अराफात से संपर्क किया। उन्होंने वीडियो के बांग्लादेश का होने की पुष्टि की।
दूसरा वीडियो
दूसरे वीडियो की जांच के लिए भी हमने उसके स्क्रीनशॉट को गूगल लेंस से सर्च किया। ‘ANI’ के एक्स हैंडल से 26 मार्च 2020 को वायरल क्लिप का लंबा वर्जन पोस्ट किया गया था। जानकारी के मुताबिक, “कर्नाटक के बेलगाम में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लगे लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर पुलिस ने लोगों की पिटाई की। यह घटना एक मस्जिद के बाहर तब हुई, जब लोग नमाज पढ़ने के बाद बाहर निकल रहे थे।”
‘ANI’ की वेबसाइट पर भी 26 मार्च 2020 को इस खबर को प्रकाशित किया गया था।
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ के यूट्यूब चैनल पर 26 मार्च 2020 को इस घटना से संबंधित वीडियो न्यूज पोस्ट किया गया था।

इससे साफ होता है कि दूसरा वायरल वीडियो कर्नाटक का है और छह साल से ज्यादा पुराना है।
क्या है संदर्भ?
नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज स्थित कप्तानगंज कस्बे में 26 जुलाई 2026 को कांवड़ यात्रा की तैयारी को लेकर सांप्रदायिक तनाव हो गया था। इसके बाद वहां सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई।
इस बारे में नेपाल के न्यूज पोर्टल ‘लुम्बिनी राइज’ के संपादक विनोद परियर से हमने बात की। उन्होंने कहा कि नेपाल में अब स्थिति सामान्य है और वहां कोई समस्या नहीं है।
बांग्लादेश के वीडियो को नेपाल का बताकर शेयर करने वाले एक्स यूजर की प्रोफाइल को हमने स्कैन किया। अप्रैल 2020 में बना यह अकाउंट एक खास विचारधारा से प्रभावित है और इस यूजर के 17 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा के बाद मुसलमानों के साथ मारपीट के दावे से बांग्लादेश और भारत के पुराने वीडियो वायरल किए जा रहे हैं। एक वीडियो बांग्लादेश में जुलाई 2026 में निकली एक रैली पर हुए हमले का है, जबकि दूसरा वीडियो भारत के कर्नाटक में कोरोना के समय लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर पुलिस की सख्ती का है।
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