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Fact Check: हरियाणा में बहन के दुष्कर्म का बदला लेने की वायरल कहानी मनगढ़ंत, पाकिस्‍तानी लड़के की तस्वीर वायरल

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर एक कोलाज तेजी से वायरल किया जा रहा है। इस कोलाज में पहली तस्वीर एक नाबालिग लड़के की है, जबकि दूसरी तस्वीर में कुछ पुलिसकर्मी एक शव को उठाकर ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

पोस्ट को शेयर करने वाले यूजर्स दावा कर रहे हैं कि हरियाणा में 12 साल के एक नाबालिग लड़के ने अपनी बहन के साथ हुए दुष्कर्म का बदला लेने के लिए, गांव के सरपंच के बेटे को गोलियां मारकर उसकी हत्या कर दी। इस दावे को भावनात्मक और भड़काऊ भाषा के साथ शेयर किया जा रहा है।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल पोस्ट में इस्तेमाल की गई दोनों तस्वीरें इस दावे से संबंधित नहीं हैं और अलग-अलग पुराने मामलों से जुड़ी हैं। पहली तस्वीर  एक पाकिस्तानी लड़के की 2017 की है, जो सीमा पार कर भारत आ गया था। हालांकि, बाद में छानबीन के बाद उसे वापस पाकिस्तान भेज दिया गया था।

वहीं, वायरल हो रही दूसरी तस्वीर 2016 में भोपाल में एक मुठभेड़ में मारे गए जेल से भागे हुए कैदियों की है, जो प्रतिबंधित संगठन सिमी से संबंधित थे। इसके अलावा, हरियाणा में बहन के दुष्कर्म का बदला लेने के नाम पर 12 साल के बच्चे द्वारा सरपंच के बेटे की गोली मारकर हत्या किए जाने की कोई भी आधिकारिक पुष्टि हमें नहीं मिली। वायरल पोस्ट पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी है।

क्या है वायरल पोस्ट में?

इंस्टाग्रम अकाउंट ‘bollywood.actor.77’ ने वायरल पोस्ट को 18 फरवरी 2026 को शेयर किया, जिस पर लिखा है, “अपनी बहन के बलात्कार का बदला लेने के लिए हरियाणा के एक 12 साल के लड़के ने सरपंच के बेटे को लगातार चार गोलियां मा*र दी।”

पड़ताल

हमने अपनी पड़ताल को तीन हिस्‍सों में पूरा करने का फैसला किया। पहले हिस्से में हमने वायरल पोस्ट में किए जा रहे दुष्कर्म का बदला से जुड़े दावे की पड़ताल की। वहीं दूसरे और तीसरे हिस्से में हमने वायरल पोस्ट में इस्तेमाल की गई तस्वीरों की अलग-अलग जांच की।

पहला हिस्सा

वायरल पोस्ट में दावा किया गया है, ”अपनी बहन के बलात्कार का बदला लेने के लिए हरियाणा के एक 12 साल के लड़के ने सरपंच के बेटे को लगातार चार गोलियां मा*र दी।’’ इस दावे की पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने अलग-अलग की-वर्ड से गूगल ओपन सर्च किया। सर्च में हमें किसी भी विश्वसनीय वेबसाइट पर ऐसी कोई खबर नहीं मिली।

इस दावे से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने अपने सहयोगी दैनिक जागरण में हरियाणा, हिसार के एडिटर राकेश क्रांति से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि ऐसा कोई मामला हाल-फिलहाल में हरियाणा में सामने नहीं आया है। अगर ऐसा कोई मामला होता, जिसमें 12 साल के बच्चे द्वारा सरपंच के बेटे को गोलियों से मारे जाने की बात होती, तो इसकी कवरेज भी जरूर होती।

वहीं, वायरल पोस्ट के बारे में बात करते हुए दैनिक जागरण हरियाणा गुरुग्राम में हमारे सहयोगी सीनियर रिपोर्टर संतेंद्र सिंह ने भी वायरल पोस्ट के दावे को फर्जी और मनगढ़ंत बताया।

पुष्टि के लिए हमने हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) अजय सिंघल से भी संपर्क किया। उन्होंने भी पुष्टि करते हुए बताया कि ऐसा कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं आया है। 

दूसरा हिस्सा

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल हो रही पोस्ट में इस्तेमाल की गई पहली तस्वीर को गूगल लेंस के जरिए सर्च किया। इस तस्वीर को 12 साल के उस बच्चे का बताते हुए शेयर किया जा रहा है, जिसने कथित तौर पर अपनी बहन के दुष्कर्मी को गोलियों से मारा। गूगल लेंस के जरिए सर्च किए जाने पर हमें यह तस्वीर कई न्यूज वेबसाइट पर अपलोड की हुई मिली।

पाकिस्तान की न्यूज वेबसाइट जिओ टीवी की 8 दिसंबर 2017 की खबर में बताया गया, भारत में कैद, सुनने और बोलने में अक्षम 15 साल के लड़के की नागरिकता, पाकिस्तान की पुष्टि की गई है। पंजाब रेंजर्स की एक टीम उसके घर गई और नागरिकता की जांच की। पाकिस्तान उच्चायोग भारतीय अधिकारियों के संपर्क में है, ताकि लड़के को जल्द से जल्द उसके देश वापस भेजा जा सके। भारतीय अधिकारियों के अनुसार उसे 17 मई को गिरफ्तार किया गया था।

हिंदुस्तान टाइम्स और इंडियन एक्सप्रेस की वेबसाइट पर दिसंबर 2017 की खबरों के अनुसार, “मई में बिना किसी यात्रा दस्तावेज के भारतीय सीमा में आने  वाले पाकिस्तान के 12 वर्षीय दिव्यांग बच्चे को मंगलवार को फिरोजपुर के किशोर न्याय बोर्ड ने बरी कर दिया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि फरीदकोट के बाल गृह में रह रहे इस बच्चे को जल्द ही उसके देश भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग ने भी विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर उसकी रिहाई का अनुरोध किया था। बच्चे की पहचान लाहौर निवासी लड़के के रूप में हुई है।

इसी बुनियाद पर न्यूज सर्च में हमें यह तस्वीर ‘रोजाना स्पोक्स मैन’ की न्यूज वेबसाइट पर भी 2 जनवरी 2018 को एक खबर के साथ मिली। खबर में बताया गया कि लगभग सात महीने पहले फिरोजपुर के रास्ते गलती से भारतीय सीमा में आ गए 12 वर्षीय, बोलने और सुनने में अक्षम पाकिस्तानी बच्चे को आज वापस पाकिस्तान भेजा जा रहा है। बच्चे की पहचान हसनैन के रूप में हुई है। फरीदकोट के डिप्टी कमिश्नर राजीव प्रशर ने बताया कि उसे अमृतसर के अटारी ले जाया गया, ताकि अटारी-वाघा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपा जा सके। बीएसएफ ने मई 2017 में इस बच्‍चे को फिरोजपुर के हुसैनीवाला से पकड़ा था और बिना दस्तावेज सीमा पार करने पर उसके खिलाफ संबंधित भारतीय कानूनों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

 डॉन न्यूज की वेबसाइट पर भी इस मामले से जुड़ी खबर मिली। 2 जनवरी 2018 की खबर में बताया गया कि भारतीय अधिकारियों ने सोमवार शाम, 12 वर्षीय दिव्यांग पाकिस्तानी बच्चे को वाघा सीमा पर पंजाब रेंजर्स के हवाले कर दिया । लाहौर के भंबे झुगियां इलाके के निवासी लड़के को मई में भारतीय सीमा सुरक्षा बल ने उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह गलती से भारत में प्रवेश कर गया था। उसके परिवार ने 2 मई को गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में टीवी खबरों के जरिए परिवार ने उसकी पहचान की, जिनमें बताया गया था कि बिना वैध दस्तावेज के, भारत में प्रवेश करने पर उसे गिरफ्तार कर अमृतसर जेल भेजा गया था।

तीसरा हिस्सा

पड़ताल के इस हिस्से में हमने वायरल पोस्ट में इस्तेमाल की गई एक दूसरी तस्वीर की सच्चाई जानने की कोशिश की। इस तस्वीर में एक डेड बॉडी को कुछ पुलिसकर्मी ले जाते हुए देखे जा सकते हैं। पड़ताल के इस हिस्‍से को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने गूगल लेंस के जरिए वायरल तस्वीर को सर्च किया। सर्च में हमें यह तस्वीर, फोटो एजेंसी ‘शटर स्टॉक’ की वेबसाइट पर मिली। अक्टूबर 2016 में अपलोड हुई इस तस्वीर के साथ दी गई जानकारी के अनुसार, “31 अक्टूबर 2016 को भोपाल से लगभग 42 किमी दूर आचारपुरा गांव में मुठभेड़ में मारे गए प्रतिबंधित संगठन सिमी के सदस्यों के शवों को भारतीय पुलिस अधिकारी ले जाते हुए। रिपोर्ट्स के अनुसार भोपाल जेल से रात में फरार हुए आठ कैदियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। ये सभी कैदी जेल प्रहरी की हत्या कर भागे थे और प्रतिबंधित स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) से जुड़े बताए गए हैं।”

द हिंदू की एक खबर में बताया गया, 31 अक्टूबर 2016 को भोपाल के सेंट्रल जेल से संदिग्ध संगठन सिमी (बैन संगठन) के आठ कैदी रात में भाग निकले। पुलिस और सुरक्षा बलों ने उन्हें भोपाल के बाहर मानिकहेडी/आचारपुरा गांव के पास घेर लिया। जब पुलिस ने उन्हें आत्मसमर्पण करने को कहा, तो उन्होंने फायरिंग की, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में सभी को एनकाउंटर में मार गिराया।

इस मामले से जुड़ी खबरें और भी कई न्यूज वेबसाइट पर पढ़ी जा सकती हैं।

अब बारी थी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले इंस्टाग्रम अकाउंट ‘bollywood.actor.77’ की सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि यूजर को दो हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। वहीं, इस प्रोफाइल से काफी एक्टिव पोस्ट की जाती हैं।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल पोस्ट में इस्तेमाल की गई दोनों तस्वीरें किए जा रहे दावे से संबंधित नहीं हैं और अलग-अलग पुराने मामलों से जुड़ी हैं। पहली तस्वीर एक पाकिस्तानी लड़के की 2017 की है, जो सीमा पार कर भारत आ गया था। हालांकि, बाद में छानबीन के बाद उसे वापस पाकिस्तान भेज दिया गया था। वहीं, वायरल हो रही दूसरी तस्वीर 2016 में भोपाल में एक मुठभेड़ में मारे गए जेल से भागे हुए कैदियों की है, जो प्रतिबंधित संगठन सिमी से संबंधित थे। इसके अलावा, हरियाणा में बहन के दुष्कर्म का बदला लेने के नाम पर 12 साल के बच्चे द्वारा सरपंच के बेटे की गोली मारकर हत्या किए जाने की कोई भी आधिकारिक पुष्टि हमें नहीं मिली। वायरल पोस्ट पूरी तरह मनगढ़ंत और फर्जी है।

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