नई दिल्ली (शरद प्रकाश अस्थाना)। ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में हुए रोबोटिक डॉग विवाद में गलगोटिया यूनिवर्सिटी को इससे बाहर कर दिया गया है। इस मामले में कांग्रेस के एक्स हैंडल से एक पोस्ट की गई है। इसमें दावा किया गया है कि चीन की मीडिया ने चीनी रोबोट को अपना बताए जाने के मामले में भारत का मजाक उड़ाया है। इसके साथ एक्स हैंडल ‘China pulse’ की पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया है।
क्या है वायरल पोस्ट?
कांग्रेस के एक्स हैंडल से 18 फरवरी 2026 को एक्स की दो पोस्ट (आर्काइव लिंक) के स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए लिखा गया, “AI को लेकर मोदी सरकार ने दुनिया भर में भारत का मजाक उड़वाया है। अभी चल रहे AI समिट में, चीनी रोबोट को हमारे अपने रोबोट के तौर पर दिखाया जा रहा है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह सच में भारत के लिए शर्मनाक है। इससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह है कि मोदी के मंत्री अश्विनी वैष्णव भी इस झूठ में शामिल हैं और भारतीय समिट में चीन के रोबोट को प्रमोट कर रहे हैं। मोदी सरकार ने देश की इमेज को ऐसा नुकसान पहुंचाया है, जिसकी भरपाई नहीं हो सकती – उन्होंने AI को मजाक बना दिया है – जबकि यह एक ऐसा फील्ड है, जिसमें हम अपनी डेटा पावर के दम पर दुनिया के लीडर बन सकते थे। (दिल्ली में) चल रहे AI समिट में चीनी रोबोट को अपना बताकर दिखाया जा रहा है। चीनी मीडिया ने हमारा मजाक उड़ाया है। यह भारत के लिए सच में शर्मनाक है।”
पोस्ट में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और China pulse @Eng_china5 की पोस्ट के स्क्रीनशॉट को शेयर किया गया है।
क्या है मामला?
एबीपी न्यूज की 18 फरवरी की रिपोर्ट के अनुसार, एआई इम्पैक्ट समिट में ग्रेटर नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर एक रोबोटिक डॉग दिखाया गया। इसको लेकर आरोप लगा कि यूनिवर्सिटी ने चीन के रोबोट को अपना आविष्कार बता कर पेश किया। दावा किया गया कि यह रोबोट चीन की कंपनी Unitree Robotics का बनाया हुआ मॉडल है, जिसका नाम Unitree Go2 है और यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब 2,800 डॉलर (लगभग 2-3 लाख रुपये) में खरीदा जा सकता है।
इसको लेकर गलगोटिया की तरफ से 18 फरवरी को एक्स हैंडल पर पोस्ट कर कहा गया, ”AI समिट में हुए कन्फ्यूजन के लिए हम माफी मांगना चाहते हैं। पवेलियन में मौजूद हमारे एक रिप्रेजेंटेटिव को गलत जानकारी थी।”
पड़ताल
इसके बाद हमने एक्स हैंडल ‘China pulse @Eng_china5’ के बारे में जानने के लिए उसका अकाउंट स्कैन किया। इसके बायो में लिखा है, ‘China-related news and the international struggle for influence in Eurasia and a multipolar world’. (चीन से जुड़ी खबरें और यूरेशिया और मल्टीपोलर दुनिया में असर के लिए इंटरनेशनल संघर्ष)।
中国相关动态与欧亚地区及多极世界的国际影响力博弈 (चीन के संबंधित विकास और यूरेशिया और मल्टीपोलर दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव का खेल)।
इसमें लोकेशन बीजिंग दिखाई गई है और यह अप्रैल 2022 से सक्रिय है।

इसकी और जांच करने पर पता चला कि यह अकाउंट ‘वेस्ट एशिया’ बेस्ड है। जून 2024 में यह वेरिफाई हुआ और अब तक छह बार अपना यूजर नेम बदल चुका है। अंतिम बार यूजर नेम जुलाई 2025 में बदला गया था।

हालांकि, एक्स पर दी गई जानकारी के अनुसार, जिस देश या क्षेत्र में यह अकाउंट है, उस पर हाल की यात्रा या कुछ समय के लिए दूसरी जगह जाने का असर पड़ सकता है। यह डेटा सही नहीं हो सकता है और समय-समय पर बदल सकता है।
हमने इसके पुराने यूजर नेम पता करने के लिए ilo.so की मदद से इसकी ट्विटर आईडी निकाली। यह ‘1517523151219044353’ है। आपको बता दें कि यूजर नेम भले ही कितनी भी बार बदल लिया जाए, लेकिन उस अकाउंट की न्यूमेरिकल नंबर वाली यह ट्विटर आईडी हमेशा एक ही रहती है।
इस आधार पर हमने सर्च इंजन यांडेक्स पर इस आईडी के बारे में सर्च किया। हमें पता चला कि पहले इसका एक यूजर नेम ‘TZ00G’ भी रह चुका है।

वेबैक मशीन पर सर्च करने पर हमें इस अकाउंट का एक वेब पेज मिला, जिसे 7 मार्च 2025 को सेव किया गया है। इसमें लोकेशन ‘लंदन, रियाद’ दी गई है। इसकी प्रोफाइल में गैर हिंदी भाषा में जानकारी दी गई है।

इस पर ईरान और अमेरिका से संबंधित पोस्ट दिख रही हैं।
गूगल ट्रांसलेट की मदद से पता चला कि अरबी भाषा में लिखा है, “फैसले लेने के सोर्स के करीब || दुनिया की सबसे ज़रूरी घटनाओं की कवरेज || सभी खबरें हमारे टेलीग्राम चैनल पर उपलब्ध हैं।”
टेलीग्राम चैनल के लिंक को चेक करने पर यह हमें ‘China pulse’ के टेलीग्राम चैनल पर ले जाता है।

इस ट्विटर आईडी ‘1517523151219044353’ के बारे में हमने गूगल पर और अधिक सर्च किया, तो ट्विकॉपी पर इसके पोस्ट मिले।

इसमें अकाउंट के सक्रिय होने की तारीख 22 अप्रैल 2022 दी गई है। इसके बायो में भी अरबी भाषा में जानकारी लिखी है, जिसमें टेलीग्राम चैनल का लिंक भी दिया गया है, जो हमें ‘China pulse’ के टेलीग्राम चैनल पर ले जाता है।

हमने ट्विटर एडवांस सर्च की मदद से इसके 22 अप्रैल 2022 के शुरुआती पोस्ट चेक किए। ये अरबी भाषा में पोस्ट किए गए हैं।
इसके बाद हमने गूगल जेमिनी की मदद से ट्विटर आईडी ‘1517523151219044353’ के बारे में और अधिक सर्च किया। इससे पता चला कि इस अकाउंट का पहला ज्ञात नाम ‘@AmanUll09192455’ है।
‘द टेलीग्राफ’ की 30 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, “एक्स 2009 से चीन में बैन है और देश के ग्रेट फायरवॉल ने इसे ब्लॉक कर दिया है। हालांकि, यह ऐप हांगकांग और मकाऊ जैसे चीनी बोलने वाले इलाकों में अभी भी उपलब्ध है, जहां इंटरनेट के अलग नियम हैं। X ताइवान में चीनी बोलने वालों के लिए भी उपलब्ध है।”
इससे पता चलता है कि इस अकाउंट की पहले लोकेशन ‘लंदन, रियाद’ लिखी थी, जो अब बदलकर ‘बीजिंग’ की गई है। पहले इस पर अरबी भाषा में पोस्टिंग होती थी, लेकिनअब अंग्रेजी में हो रही है।
The post गलगोटिया यूनिवर्सिटी के मामले में पोस्ट करने वाले एक्स हैंडल China pulse की यह है सच्चाई! appeared first on Vishvas News.
0 Comments