नई दिल्ली (Vishvas News)। सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इसमें एक सीनियर पुलिस अफसर को स्क्रीन पर दिए गए मोबाइल नंबर से गरीब लोगों से आर्थिक मदद मांगने की बात कहते हुए सुना जा सकता है। इस वीडियो में इस अधिकारी को यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि जिन्हें भी मदद चाहिए, वह मोबाइल नंबर पर एक हजार रुपए भेज दें।
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की जांच की। दावा फर्जी साबित हुआ। रांची के पूर्व सिटी एसपी के वीडियो के साथ छेड़छाड़ करके इसे बनाया गया है। इसके जरिए ठगी की जा रही है।
क्या हो रहा है वायरल
फेसबुक पेज Harsha Sai पर एक वीडियो को पोस्ट करते हुए कैप्शन में लिखा गया कि Harsha Sai help call me 9104118768
वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों ही लिखा गया है। इसका आर्काइव वर्जन यहां देखा जा सकता है।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सबसे पहले इसमें मौजूद सीनियर पुलिस अफसर के चेहरे के कई स्कीनशॉट निकालकर गूगल लेंस टूल के जरिए सर्च किया। हमें कई खबरें मिलीं, जिनसें पता चला कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति रांची के सिटी एसपी राजकुमार मेहता हैं, जिनका कुछ दिन पहले ही ट्रांसफर हुआ है।
इसके बाद हमने कीवर्ड सर्च के जरिए खोजना शुरू किया। हमें भास्कर डॉट कॉम पर पब्लिश एक खबर के जरिए पता चला इस वीडियो को लेकर पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। खबर के अनुसार, “सोशल मीडिया पर सिटी एसपी राजकुमार मेहता का एडिटेड वीडियो वायरल कर ठगी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में लालपुर टीओपी प्रभारी सत्यप्रकाश उपाध्याय ने लालपुर थाना में एक फेसबुक आईडी और मोबाइल नंबर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि इस फेसबुक आईडी और मोबाइल नंबर के जरिए एसपी का वीडियो एडिट कर लोगों से पैसे वसूलने की कोशिश की जा रही है।”
जांच को आगे बढ़ाते हुए हमने राजकुमार मेहता के वीडियो निकाले। इसे वायरल वीडियो से तुलना की। हमें कई बातें एक-सी मिलीं। वीडियो में दिख रहे शख्स एक ही हैं। उनके पीछे लगे झंडे और प्रशस्ती पत्र को दोनों वीडियो में देखा जा सकता है।

विश्वास न्यूज ने वायरल वीडियो को लेकर सहयोगी डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट (डीएयू) से संपर्क किया। डीएयू (एमसीए की पहल) की एक्सपर्ट टीम ने वीडियो का विश्लेषण किया। इसमें वीडियो में एआई टूल इस्तेमाल नहीं किए जाने के संकेत मिले। उनके अनुसार, वीडियो में मौजूद आवाज डब हो सकती है।
सर्च के दौरान पता चला कि मई के अंतिम सप्ताह में ही राजकुमार मेहता का रांची से जामताड़ा ट्रांसफर किया जा चुका है।
विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए सहयोगी दैनिक जागरण, जामताड़ा के प्रभारी कौशल सिंह से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि वायरल वीडियो काफी पुराना है। इस संदर्भ में जामताड़ा के नए पुलिस अधीक्षक राजकुमार मेहता से भी बात की गई । उन्होंने कहा कि वीडियो में दिख रहे शख्स वही हैं, लेकिन आवाज उनकी नहीं है। यह एडिटेड वीडियो है। इसे लेकर रांची में पहले एफआईआर भी की जा चुकी है। जामताड़ा एसपी की ओर से लोगों से अपील की गई है कि ऐसे वीडियो को सच न मानें। यह ठगी का एक तरीका है।
पड़ताल के अंत में फर्जी पोस्ट करने वाले यूजर की जांच की गई। हर्षा साई नाम के इस पेज पर केवल फर्जी वीडियो ही मौजूद था। इसके अलावा यहां कोई खास जानकारी नहीं दी गई है।
निष्कर्ष : विश्वास न्यूज की जांच में वायरल वीडियो फर्जी साबित हुआ। आईपीएस राजकुमार मेहता की आवाज को एडिट करके यह पोस्ट तैयार की गई है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। ठगी के लिए इस वीडियो को तैयार किया गया है।
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