नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई 2026 को गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे और ज्योतिर्लिंग की पूजा की। इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने एक तस्वीर को वायरल करते हुए दावा किया कि सोमनाथ मंदिर के पास धर्म विशेष के लोगों द्वारा अतिक्रमण करके बनाई गई मस्जिद, दरगाह और बस्तियां कल रात तोड़ दी गईं । इसे हालिया समझकर कई सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं
विश्वास न्यूज ने विस्तार से वायरल पोस्ट की जांच की। यह भ्रामक साबित हुई। जांच में पता चला कि सितंबर 2024 में वायरल पोस्ट में दिखाई गई कार्रवाई हुई थी। इसे अब हालिया कार्रवाई बताकर पीएम मोदी की सोमनाथ यात्रा के बीच गलत तरीके से वायरल किया गया। सितंबर 2024 में सोमनाथ में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी।
क्या है वायरल?
फेसबुक यूजर ‘मुनेश कुमार’ ने 10 मई 2026 को एक तस्वीर शेयर करते हुए दावा किया, “जिसको ख़ुशी हुई है वो बोलेगा हर हर महादेव। प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर के पीछे और बगल में मुस्लिम समुदाय ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया था। यहां कई सारे मस्जिद दरगाह बन गए थे और उनकी बस्तियां बस गई थी। कल रात 36 जेसीबी, 10 हाइड्रोलिक हैमर हिताची, 400 से ज्यादा ट्रैक्टर ट्राली लगाकर पूरी रात बुलडोजर कार्रवाई चली। सभी अवैध ढांचों को तोड़कर समुद्र में बहा दिया गया।”

सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स भी वायरल पोस्ट को फर्जी दावे के साथ शेयर कर रहे हैं। वायरल पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले गूगल लेंस टूल का इस्तेमाल किया। वायरल तस्वीर को इस टूल के माध्यम से सर्च करने पर हमें असली और इससे मिलती जुलती तस्वीरें कई न्यूज वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल्स पर मिलीं।
‘टेलीग्राफ इंडिया डॉट कॉम’ पर 26 अक्टूबर 2024 को एक खबर विस्तार से प्रकाशित की गई। इसमें वायरल तस्वीर से मिलती-जुलती दूसरे एंगल की एक तस्वीर मिली। इसमें बताया गया कि गिर सोमनाथ में अतिक्रमण हटाया गया है। यह अतिक्रमण 28 सितंबर 2024 को हटाया गया था।

सर्च के दौरान हमें ‘जी उत्तर प्रदेश उत्तराखंड’ के यूट्यूब चैनल पर एक रिपोर्ट मिली। 29 सितंबर 2024 की इस रिपोर्ट में बताया गया कि सोमनाथ मंदिर के पीछे अतिक्रमण हटाने के लिए 58 बुलडोजरों का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट में वायरल तस्वीर वाले फुटेज को भी देखा जा सकता है।
‘न्यूज 18’ की वेबसाइट पर 30 सितंबर 2024 को प्रकाशित एक खबर में बताया गया कि गुजरात के गिर में सोमनाथ मंदिर से सटे प्रभास पाटन कस्बे में अल्पसंख्यक समुदाय के 9 धार्मिक इमारतों को ढहाया गया। इनमें मस्जिद, दरगाह और एक कब्रिस्तान भी शामिल थे। इसके बाद यहां माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। प्रशासन के अनुसार, यह सब सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बना हुआ था।
विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए गुजराती जागरण के एसोसिएट एडिटर जीवन कर्पूरिया से संपर्क किया और उनके साथ वायरल पोस्ट को शेयर किया। उन्होंने बताया कि वायरल तस्वीर पुरानी है। हाल-फिलहाल में सोमनाथ में अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। हालांकि, सितंबर 2024 में बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई थी।
क्या है संदर्भ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 मई 2026 को गुजरात के सोमनाथ मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के 75 साल पूरा होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। 1951 में इस मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ था। पीएम मोदी ने मंदिर के शिखर पर जलाभिषेक किया। इसके लिए 11 तीर्थों के जल को एक बड़े कलश में रखा गया था। इसके अलावा मंदिर में उन्होंने विशेष पूजा भी की।
जांच के अंत में फेसबुक यूजर की प्रोफाइल को स्कैन किया गया। यूजर को पांच हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट 2012 में बनाया गया था।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट भ्रामक साबित हुई। वर्ष 2024 के सितंबर महीने में सोमनाथ मंदिर के आसपास के इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी। उस वक्त अवैध बस्तियों के अलावा अवैध रूप से बने धार्मिक स्थानों को हटाया गया था। उसी वक्त की तस्वीर को हालिया कार्रवाई बताकर वायरल किया जा रहा है।
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