नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन से जोड़कर दो तस्वीरों का एक कोलाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस कोलाज में नेपाल में आई बाढ़ से पहले और बाद की तस्वीर को दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स इस तस्वीर को असली मानकर शेयर कर रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह वायरल तस्वीर फर्जी है। असल में इसे बनाने के लिए एआई-तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। हालांकि, नेपाल में आई बाढ़ के कारण तबाही मची हुई है और जानमाल का भी काफी नुकसान हुआ है।
क्या हो रहा है वायरल ?
फेसबुक यूजर ‘Shyam Sunder Singh” ने 26 अगस्त 2026 को वायरल तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “नेपाल त्रासदी का ताज़ा हाल।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले फोटो को गूगल लेंस टूल के जरिए स्कैन किया। यह तस्वीर हमें कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स के अलावा कहीं और नहीं मिली। हमने कीवर्ड्स की मदद से भी गूगल पर सर्च किया, लेकिन इस वायरल तस्वीर से जुड़ी कोई विश्वसनीय न्यूज रिपोर्ट हमें नहीं मिली। ऐसे में तस्वीर के एआई से बने होने का हमें संदेह हुआ।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल फोटो को एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से चेक करना शुरू किया। सबसे पहले हमने ‘Hive Moderation’ की मदद से फोटो को सर्च किया। हाइव के एनालिसिस में वायरल तस्वीर के एआई से बने होने के करीब 100 फीसदी संकेत मिले। इस टूल के अनुसार, फोटो को ‘seedance2’ की मदद से बनाया गया है।

इसके बाद हमने ‘INVID’ का इस्तेमाल किया और इस टूल ने वायरल फोटो के एआई से बने होने की करीब 99 फीसदी संभावना जताई।

तस्वीर को हमने तीसरे टूल ‘Sightengine’ की मदद से भी जांचा। इस टूल ने भी फोटो के एआई से बने होने की संभावना जताई।

अधिक जानकारी के लिए हमने एआई एक्सपर्ट डॉ. अजहर माचवे से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल तस्वीर में तबाही के पहले वाली तस्वीर में देखा जा सकता है कि घर और कार की बनावट सही नहीं है। तो वहीं, दूसरी तरफ का इलाका काफी बदला हुआ लग रहा है। ऐसा अक्सर एआई से बनाई गई तस्वीरों में देखने को मिलता है।
क्या है संदर्भ?
नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर 26 अगस्त 2026 को अचानक बाढ़ आ गई। The Himalayan Times की वेबसाइट के मुताबिक, इस बाढ़ में अभी तक कुल 168 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1,100 से अधिक लोग लापता हैं। अचानक आई इस बाढ़ के कारण नेपाल के कई इलाकों में तबाही मच गई है। Nepali Times की रिपोर्ट के अनुसार, मरने वालों की संख्या सैकड़ों तक पहुंचने की उम्मीद है। नवलपरासी जिले में नारायणी नदी में 200 किलोमीटर नीचे की ओर इंसानी शव, जानवरों की लाशें और मलबा बहते हुए देखे गया है। पूरी रिपोर्ट को यहां और यहां पढ़ा जा सकता है।
Kathmandu Post की वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, “यह बाढ़ तब आई जब एक हिमस्खलन (avalanche) ने भोटेकोशी की सहायक नदी ‘ल्हेन्डे’ के बहाव को रोक दिया। फिर पानी का पहला जोर रसुवागढ़ी में चीन के साथ नेपाल की सीमा के पास स्थित ‘तिमुुरे’ इलाके पर पड़ा। बाढ़ का पानी आगे बढ़ने से पहले ही, सैकड़ों लोगों की आबादी वाली यह बस्ती काफी हद तक बह गई। इलाके में बारिश की कोई खबर नहीं थी, इसलिए निवासियों को इस आपदा की कोई चेतावनी नहीं मिली थी और जब बाढ़ आई, तो वे अपने रोजमर्रा के कामों में लगे हुए थे।
अंत में हमने फोटो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को करीब छह हजार लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि नेपाल में बाढ़ से मची तबाही के दावे से वायरल तस्वीर फेक है। इस फोटो को एआई टूल्स की मदद से बनाया गया है। हालांकि, नेपाल में आई बाढ़ के कारण तबाही हुई है और जानमाल का भी काफी नुकसान हुआ है।
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