नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की एक तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। इस फोटो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह 1990 के दशक की है।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि यह वायरल तस्वीर फर्जी है। असल में इसे बनाने के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
क्या हो रहा है वायरल?
इंस्टाग्राम यूजर ‘imramkumarpal’ ने 11 अगस्त 2026 को वायरल तस्वीर को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “मित्रो कहते 1990 की पिक है मोदी ओर अमित शाह का जोड़ी तो बहुत पुरानी ओरिजिनल है।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
विश्वास न्यूज ने दावे की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले फोटो को गूगल लेंस टूल के जरिए स्कैन किया। यह तस्वीर हमें कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स के अलावा कहीं और नहीं मिली। हमने कीवर्ड्स की मदद से भी गूगल पर सर्च किया, लेकिन इस वायरल दावे से जुड़ी कोई विश्वसनीय न्यूज रिपोर्ट हमें नहीं मिली। ऐसे में तस्वीर के एआई से बने होने का हमें संदेह हुआ।
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल फोटो को एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से चेक करना शुरू किया। सबसे पहले ‘AI or Not’ की मदद से इस फोटो को जांचा गया। इस एनालिसिस में तस्वीर के एआई से बने होने के 97 फीसदी संकेत मिले।

इसके बाद हमने ‘INVID’ का इस्तेमाल किया और इस टूल ने वायरल फोटो के एआई से बने होने की करीब 99 फीसदी संभावना जताई।

तस्वीर को हमने तीसरे टूल ‘Deep Fake Detection’ की मदद से भी जांचा। इस टूल ने भी फोटो के एआई से बने होने की संभावना जताई। इसकी एनालिसिस के मुताबिक, वायरल फोटो में पीएम मोदी और अमित शाह की आंखें काफी अननैचुरल (कृत्रिम) लगती हैं। दोनों के चेहरे भी काफी सिमेट्रिक हैं, जो एआई से बनी तस्वीरों में अक्सर देखने को मिलता है।

पड़ताल के दौरान हमें वायरल तस्वीर ‘K S Gurulingaswamy Guru’ नाम के फेसबुक अकाउंट पर मिली। इस फोटो को 11 अगस्त 2026 को शेयर किया गया था। फोटो पर एआई-निर्मित लिखा है।

अधिक जानकारी के लिए हमने बीजेपी प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल तस्वीर को बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल किया गया है।
क्या है संदर्भ?
सोशल मीडिया पर अक्सर सत्ता और विपक्ष के प्रमुख नेताओं की एआई से बनाई गई तस्वीरें फर्जी दावे के साथ वायरल होती रहती हैं। कभी चौधरी चरण सिंह के सामने जमीन पर बैठे मुलायम सिंह यादव की एआई तस्वीर, तो कभी सोनम वांगचुक की फेक फोटो वायरल हुई। इनके अलावा यूसुफ पठान के भाजपा में शामिल होने की भी एक फेक तस्वीर वायरल हुई थी। जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान पीएम मोदी से हाथ मिलाते ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके की AI तस्वीर भी वायरल हुई थी।
अंत में हमने फोटो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को एक लाख 50 हजार से अधिक लोग इंस्टाग्राम पर फॉलो करते हैं। यूजर एक खास विचारधारा से जुड़ी पोस्ट शेयर करता है।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि पीएम मोदी और अमित शाह के युवा दिनों की वायरल तस्वीर फर्जी है। इस फोटो को एआई की मदद से बनाया गया है।
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