नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। राजधानी के जंतर’-मंतर पर 21 अगस्त 2026 को आरक्षण के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुआ था। वहीं दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की 26 सेकंड की एक क्लिप वायरल हो रही है। इसमें पीएम को यह बोलते हुए सुना जा सकता है, “मुझे बताइए ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए, तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा? तुम मुझे पानी नहीं भरने देते थे। तुम मुझे मंदिर नहीं जाने देते थे। तुम मेरे बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने से मना करते थे।”
सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स पीएम के भाषण की अधूरी क्लिप को गलत संदर्भ के साथ वायरल कर रहे हैं। इसके साथ दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी के मन में सवर्ण समाज को लेकर जहर भरा हुआ है।
विश्वास न्यूज ने विस्तार से इसकी जांच की। वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाज की एकता पर बल देते हुए और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की तारीफ करते हुए किसी दूसरे संदर्भ में वायरल क्लिप वाली बात कही थी इस क्लिप के आधे-अधूरे हिस्से को अब गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
क्या हो रहा है वायरल?
फेसबुक यूजर ‘Hanuwanth Singh Rathore’ ने 20 अगस्त 2026 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “सवर्णों के लिए गड्ढे खोदने वाले एवं तथाकथित दलितों को उकसाने वाले, चंद्रशेखर रावण की पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख नरेंद्र मोदी जी ही है, देश में भीमवाद का सबसे बड़ा समर्थक देश का प्रधानमंत्री है, अब आप ही लोग देखिए कि किस प्रकार से सवर्ण समाज के लिए इस व्यक्ति के मन में कितना विरोध भरा हुआ है।”

वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां देखें।
पड़ताल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हेयरस्टाइल और वीडियो की गुणवत्ता से यह तो स्पष्ट था कि वायरल क्लिप काफी पुरानी है। विश्वास न्यूज ने सबसे पहले वायरल वीडियो के कई कीफ्रेम्स निकाले और इन्हें गूगल लेंस टूल के जरिए सर्च किया। हमें असली वीडियो ‘टाइम्स नाउ’ के यूट्यूब चैनल पर मिला। इसे 21 मार्च 2016 को अपलोड किया गया था। विश्वास न्यूज ने जब इस वीडियो को पूरा सुना तो 33वें मिनट पर वायरल क्लिप वाला अंश मिला।
असली वीडियो में पीएम मोदी समाज की एकता पर बल देने की बात कर रहे हैं। बाबासाहेब का उदाहरण देते हुए पीएम मोदी कहते हैं, “यह सरकार इतनी संवेदनशील है कि जिस बात से देश आगे बढ़ता है, वह उसकी प्राथमिकता होती है, और हम भी उस पर चलते हैं। मेरा कहने का तात्पर्य यह है भाइयों कि हमें समाज की एकता को बल देना है और बाबासाहेब से यही तो सीखना पड़ेगा। आप कल्पना कर सकते हैं कि एक महापुरुष, जिसको इतना जुल्म सहना पड़ा हो, जिसका बचपन अन्याय, उपेक्षा और उत्पीड़न में बीता हो, जिसने अपनी मां को अपमानित होते देखा हो, मुझे बताइए ऐसे व्यक्ति को मौका मिल जाए तो हिसाब चुकता करेगा कि नहीं करेगा? तुम मुझे पानी नहीं भरने देते थे, तुम मुझे मंदिर नहीं जाने देते थे, तुम मेरे बच्चों को स्कूल में एडमिशन देने से मना करते थे।”
आगे वह कहते हैं, “मनुष्य का जो लेवल है ना, वहां ये बहुत स्वाभाविक है, लेकिन जो मानव से कुछ ऊपर हैं वो बाबासाहेब आंबेडकर थे, कि जब उनके हाथ में कलम थी, कोई भी निर्णय करने की ताकत थी, लेकिन आप पूरा संविधान देख लीजिए, पूरी संविधान सभा की डिबेट देख लीजिए, बाबासाहेब आंबेडकर की बातों में, वाणी में, शब्दों में, कहीं कटुता नजर नहीं आती है। कहीं बदले का भाव नजर नहीं आता है। उनका भाव यही रहा और वह भाव क्या था, मैं अपने शब्दों में कह सकता हूं कि कभी-कभार खाना खाते समय दांतों के बीच हमारी जीभ कट जाती है, लेकिन हम दांत तोड़ नहीं देते हैं, क्योंकि हमें पता है, दांत भी मेरे हैं, जीभ भी मेरी है। बाबासाहेब के लिए सवर्ण भी उनके थे और हमारे दलित, पीड़ित और शोषित भी। दोनों ही उनके लिए बराबर थे और इसलिए बदले का नामोनिशान नहीं था, कटुता का नामोनिशान नहीं था।”
सर्च के दौरान हमें असली वीडियो नरेंद्र मोदी के यूट्यूब चैनल पर भी मिला। इसे 21 मार्च 2016 को अपलोड किया गया था। इसमें बताया गया कि डॉ. बी.आर. आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक की आधारशिला रखते हुए पीएम मोदी के संबोधन का यह वीडियो है। वायरल क्लिप वाला हिस्सा इस वीडियो में 36वें मिनट से देखा जा सकता है।
सर्च के दौरान शिलान्यास का वीडियो हमें ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ पर मिला। 21 मार्च 2016 के इस वीडियो में बताया गया कि पीएम मोदी ने दिल्ली में डॉ. भीमराव आंबेडकर नेशनल मेमोरियल की आधारशिला रखी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आरक्षण दलितों का अधिकार है और उसे कोई नहीं छीन सकता।
विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए नरेंद्र मोदी की वेबसाइट का रुख किया। वहां हमें उनका पूरा भाषण मिला। इसे 21 मार्च 2016 को अपलोड किया गया था। पूरे भाषण को संदर्भ के साथ यहां पढ़ा जा सकता है।

विश्वास न्यूज ने जांच के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. विजय सोनकर शास्त्री से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना बयान गलत संदर्भ के साथ वायरल किया जा रहा है। उन्होंने कभी भी सवर्णों के खिलाफ ऐसा कोई विवादास्पद बयान नहीं दिया है।
क्या है संदर्भ?
‘आजतक’ की 22 अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर 21 अगस्त 2026 को बड़ी संख्या में जनरल कैटेगरी के लोगों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन किया। इसके अलावा यूजीसी के विवादास्पद इक्विटी रेगुलेशंस का भी विरोध किया गया।
जांच के अंत में फर्जी पोस्ट करने वाले यूजर की जांच की गई। पता चला कि यूजर को फेसबुक पर करीब पांच हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट 2018 में बनाया गया था। यूजर हैदराबाद में रहता है।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की जांच में वायरल पोस्ट फर्जी साबित हुई। पीएम मोदी ने सवर्णों के खिलाफ बयान नहीं दिया है। उनके 10 साल पुराने एक वीडियो की कुछ सेकंड की क्लिप गलत संदर्भ के साथ वायरल की जा रही है।
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