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Fact Check: गुजरात के सूरत में भारी बारिश का बताकर वायरल किया गया AI जेनरेटेड वीडियो

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। गुजरात के सूरत का बताकर 20 सेकंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल किया जा रहा है। इस वीडियो में गगनचुंबी इमारतों को पानी में डूबा हुआ दिखाया गया है। इस वीडियो के बहाने गुजरात की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा जा रहा है। इस वीडियो को सच मानकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स शेयर कर रहे हैं।

विश्वास न्यूज ने वायरल वीडियो की जांच की। यह फर्जी साबित हुई। इसे एआई टूल की मदद से बनाया गया है। हालांकि, यह सही है कि मानसून के सक्रिय होने के बाद सूरत के कुछ इलाकों में बारिश ने काफी कहर ढाया था। लेकिन इस वायरल वीडियो का सूरत से कोई संबंध नहीं है। सूरत और आसपास के जिलों में 7 और 8 जुलाई 2026 से लगातार भारी बारिश के कारण बाढ़ के हालात बन गए थे।

क्या है वायरल?

फेसबुक यूजर ‘अमरेश कुमार’ ने 16 जुलाई 2026 को एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “30 साल से मोदी बीजेपी सरकार गुजरात मॉडल गुजरात के सूरत सिटी की ड्रोन कैमरे से ली गई तस्वीरें।”

वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों लिखा गया है। इसके आर्काइव वर्जन को यहां देखा जा सकता है। इसे सच मानकर कई यूजर्स सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।

पड़ताल

विश्वास न्यूज ने सबसे पहले वायरल पोस्ट के आधार पर कुछ कीवर्ड बनाए और फिर इन्हें गूगल ओपन सर्च टूल के जरिए सर्च किया। हमें पता चला कि जुलाई 2026 की शुरुआत में सूरत में भारी बारिश हुई थी, जिससे काफी नुकसान हुआ था। ‘भास्कर डॉट कॉम’ की 8 जुलाई 2026 की खबर के अनुसार, भारी बारिश के कारण सूरत के निचले इलाकों में पानी भर गया था। करंट लगने से कुछ लोगों की जान भी चली गई थी।

‘गुजराती जागरण डॉट कॉम’ ने भी सूरत की बारिश को लेकर 8 जुलाई 2026 को एक खबर प्रकाशित की थी।

विश्वास न्यूज ने जांच के दौरान वायरल वीडियो के कई स्क्रीनशॉट को गूगल लेंस टूल के जरिए सर्च किया। हमें यह वीडियो किसी भी क्रेडिबल मीडिया संस्थान की वेबसाइट या सोशल मीडिया पर नहीं मिला।

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल वीडियो को एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से चेक करना शुरू किया। सबसे पहले हमने ‘हाइव मॉडरेशन’ टूल का इस्तेमाल किया। इस टूल की मदद से स्कैन करने पर 99.9 फीसदी से ज्यादा संभावना इस बात की जताई गई कि वीडियो एआई की मदद से बनाया गया है।

जांच को आगे बढ़ाते हुए वायरल वीडियो को दूसरे एआई डिटेक्शन टूल ‘DetectVideo AI’ से चेक किया गया। वीडियो को यहां अपलोड करके एनालिसिस करने पर इसके एआई से बने होने की संभावना 62 फीसदी आई।

जांच के दौरान वीडियो के कई कीफ्रेम्स निकाले गए। इन कीफ्रेम्स को ‘Undetectable.ai’ टूल की मदद से चेक किया गया। इसके नतीजों ने भी इसे एआई-जेनरेटेड बताया।

इसी तरह अन्य एआई डिटेक्टर टूल ‘WasItAI’ की मदद से वायरल वीडियो को चेक किया गया। इसके नतीजे से भी यह साफ हो गया कि वीडियो को एआई की मदद से बनाया गया है।

विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए गुजराती जागरण के सूरत के वरिष्ठ संवाददाता मयूर ठाकुर से संपर्क किया और उनके साथ वायरल वीडियो को साझा किया। उन्होंने बताया कि सूरत में 7 और 8 जुलाई को काफी बारिश हुई थी और जगह-जगह पानी भी भर गया था। लेकिन वायरल वीडियो का सूरत से कोई संबंध नहीं है।

विश्वास न्यूज ने जांच के अंत में एआई एक्सपर्ट अजहर माचवे से संपर्क किया और उनके साथ वायरल वीडियो शेयर किया। उन्होंने इसे एआई जेनरेटेड बताया। उन्होंने हमें बताया कि वीडियो को जूम इन करने पर कोई डिटेल नहीं दिखती है। इसके अलावा पूरे वीडियो में नीली छत का पैटर्न बार-बार दोहराया गया है। इस तरह की खामियां अक्सर एआई से बनी तस्वीरों में होती हैं।

क्या है संदर्भ?

गुजरात के सूरत में 7 और 8 जुलाई को हुई भारी बारिश के कारण यहां के कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया था और इससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। यहां के कई सोसाइटी और अपार्टमेंट जलभराव से घिर गए थे। ‘एनडीटीवी’ की 8 जुलाई 2026 की खबर में बताया गया कि भारी जलभराव के कारण सूरत में 1200 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू करके सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था।

जांच के अंत में फर्जी वीडियो शेयर करने वाले फेसबुक अकाउंट की जांच की गई। पता चला कि यूजर को पांच हजार से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट दिसंबर 2020 में बनाया गया था। यूजर झारखंड में रहता है।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की जांच में सूरत की बारिश के नाम पर वायरल वीडियो फर्जी साबित हुआ। एआई-जेनरेटेड वीडियो को सूरत का बताकर झूठ फैलाया गया है।

https://www.facebook.com/reel/2440459239767277

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