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Fact Check: पीएम मोदी ने नहीं दिया ईरान के खिलाफ बयान, डीपफेक वीडियो वायरल

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के दरम्यान चल रही जंग के बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें पीएम मोदी को कथित तौर पर यह बोलते हुए दिखाया गया है कि उन्‍होंने इस युद्ध में इजरायल का समर्थन करते हुए ईरान को ‘आतंकी राष्‍ट्र’ बताया है। इतना ही नहीं, वीडियो में पीएम मोदी को ‘अखंड भारत’ के निर्माण की बात करते हुए भी दिखाया गया है। इस वीडियो को सच मानकर कई सोशल मीडिया यूजर्स इसे शेयर कर रहे हैं।

विश्वास न्‍यूज ने वायरल वीडियो की विस्‍तार से जांच की। दावा फर्जी साबित हुआ। दरअसल, पीएम मोदी का वायरल वीडियो डीपफेक है। इसे एआई तकनीक से बनाया गया है।

क्‍या हो रहा है वायरल?

फेसबुक पेज ‘पुष्‍पेन्‍द्र कुलश्रेष्‍ठ’ पर 23 मार्च 2026 को वायरल वीडियो को अपलोड करते हुए लिखा गया, “कड़े और स्‍पष्‍ट शब्‍दों में बोलने वाले प्रथम प्रधानमंत्री हिंदुस्‍तान का। पप्‍पू गंदगी सुन लो फिर कहोगे मोदी कुछ बोलता नहीं।”

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों ही लिखा गया है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्‍ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।

पड़ताल

विश्वास न्‍यूज ने पीएम मोदी के वायरल वीडियो की सच्‍चाई जानने के लिए सबसे पहले गूगल ओपन सर्च टूल का इस्‍तेमाल किया। यहां कीवर्ड सर्च के जरिए हमें यह पता लगाना था कि क्‍या वाकई में प्रधानमंत्री ने ऐसा कोई बयान दिया है। हालांकि, सर्च में हमें ऐसी कोई भी विश्वसनीय न्‍यूज रिपोर्ट या वीडियो नहीं मिला।

सर्च को आगे बढ़ाते हुए वायरल वीडियो के कई ग्रैब्‍स निकाले गए। फिर इन्‍हें गूगल लेंस टूल के जरिए खोजा गया। हमें असली वीडियो एएनआई के एक्‍स हैंडल पर मिला। इसे 12 मार्च 2026 को पोस्‍ट किया गया था। इस वीडियो में पीएम का पहनावा और मंच, वायरल वीडियो जैसा ही दिखा। इससे यह तो साफ हो गया कि वायरल वीडियो को इसी मूल वीडियो के एक अंश से तैयार किया गया है। एएनआई के वीडियो में पीएम मोदी ने वायरल वीडियो जैसी कोई बात नहीं कही थी।

असली वीडियो में पीएम मोदी ‘एनएक्सटी शिखर सम्मेलन’ में बोलते हुए दिखे। वीडियो में उन्‍हें वर्तमान वैश्विक संघर्षों के कारण उत्‍पन्‍न हुए ऊर्जा संकट पर बोलते हुए देखा जा सकता है। इसके अलावा पीएम मोदी देश में एलपीजी और पीएनजी की बढ़ी हुई सुविधाओं के बारे में विस्‍तार से बताते हुए दिखे।

सर्च के दौरान पीएम मोदी का पूरा भाषण उनके यूट्यूब चैनल पर भी मिला। वीडियो को अपलोड करते हुए बताया गया कि यह दिल्‍ली में 12 मार्च 2026 को हुई ‘एनएक्‍सटी समिट’ में पीएम नरेंद्र मोदी का भाषण है। विश्वास न्‍यूज ने इस पूरे भाषण को ध्‍यान से सुना। इसमें हमें वायरल वीडियो वाली कोई भी बात सुनाई नहीं दी।

सर्च के दौरान हमें पीएम मोदी का पूरा भाषण पीआईबी की वेबसाइट पर भी मिला। इसे यहां क्लिक करके पढ़ा जा सकता है।

पीआईबी की फैक्‍ट चेक यूनिट ने भी वायरल वीडियो को डीपफेक बताया। उन्‍होंने 13 मार्च 2026 को अपने एक्‍स हैंडल पर पीएम मोदी के वायरल वीडियो की सच्‍चाई पोस्‍ट की।

अधिक पुष्टि के लिए हमने वीडियो को अपने सहयोगी, ‘डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट’ (DAU) के साथ शेयर किया, जो ‘ट्रस्टेड इन्फॉर्मेशन एलायंस’ (TIA) की एक पहल है। इस टीम ने वीडियो को डीपफेक बताया।

DAU की टीम ने वीडियो को ‘Hiya’ से चेक किया, जिसमें वीडियो में मौजूद आवाज के एआई-जेनरेटेड होने की संभावना जताई गई। इसी तरह ‘Hive AI deepfake detector’ टूल के नतीजों में पीएम मोदी के चेहरे से छेड़छाड़ बताई गई।

पड़ताल के अंत में ‘पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ’ नाम के ग्रुप की जांच की गई। पता चला कि इस ग्रुप को फेसबुक पर दो लाख से ज्‍यादा लोग फॉलो करते हैं। यह ग्रुप मई 2020 में बनाया गया था।

निष्‍कर्ष: विश्वास न्‍यूज की पड़ताल में पीएम मोदी का वायरल वीडियो डीपफेक साबित हुआ। उन्‍होंने ईरान को ‘आतंकी राष्‍ट्र‘ बताते हुए इजरायल के समर्थन में कोई बात नहीं कही। असली वीडियो दिल्‍ली में हुई एक समिट का है।

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