नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति को पकड़कर लेकर जाती पुलिस का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस एक शख्स को पकड़कर गाड़ी में डालती है और गाड़ी के आस-पास काफी भीड़ मौजूद है। इसे शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह मध्य प्रदेश में ‘गौरक्षकों’ के पकड़े जाने का है।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा गलत है। असल में वीडियो राजस्थान का है और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का है। दरअसल, राजस्थान विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) से जुड़ा एक कार्यक्रम हो रहा था। इस बीच वहां पर उसका विरोध करने के लिए एनएसयूआई कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। ये वीडियो उसी विरोध-प्रदर्शन के दौरान का है।
क्या हो रहा है वायरल?
इंस्टाग्राम यूजर ‘mahavir_vinod_rana’ ने 19 जून 2026 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “लग रहा है। फैसला भारत में नहीं पाकिस्तान में सुनाया गया है। जहां मध्य प्रदेश की एक मुस्लिम जज ने 14 गौरक्षक को उम्र कैद की सजा सुना दी।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए वीडियो के कई कीफ्रेम निकाल कर उन्हें गूगल रिवर्स इमेज की मदद से सर्च किया। हमें वायरल वीडियो vijaypal_kuri_ru नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर मिला। वीडियो को 3 अप्रैल 2026 को अपलोड किया गया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, वीडियो RSS के एक कार्यक्रम के खिलाफ राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रों के प्रदर्शन का है।

vijaypal_kuri_ru की इंस्टाग्राम अकाउंट को स्कैन करने पर हमने पाया कि शख्स का नाम विजयपाल कूड़ी है। व्यक्ति कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई से जुड़ा हुआ है। प्रोफाइल पर विजयपाल कूड़ी ने खुद को एनएसयूआई का इंचार्ज और छात्र एक्टिविस्ट बताया है। पड़ताल के दौरान हमें इस प्रदर्शन से जुड़े कई अन्य वीडियो अकाउंट पर अपलोड मिले।

प्राप्त जानकारी के आधार पर हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट आजतक की वेबसाइट पर मिली। रिपोर्ट को 3 अप्रैल 2026 को प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, “विश्वविद्यालय परिसर में RSS के ‘प्रबुद्ध जन संवाद एवं सांगठनिक विस्तार’ कार्यक्रम का आयोजन प्रस्तावित था। इसी आयोजन के विरोध में NSUI ने प्रदर्शन किया और कार्यक्रम पर आपत्ति जताई। NSUI का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों का भगवाकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। संगठन का कहना था कि विश्वविद्यालय शिक्षा और शोध का केंद्र है, न कि किसी विशेष विचारधारा के प्रचार का मंच।”

अधिक जानकारी के लिए हमने विजयपाल कूड़ी से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वायरल दावा गलत है। वीडियो 3 अप्रैल को राजस्थान विश्वविद्यालय में आरएसएस के एक कार्यक्रम को लेकर हुए प्रदर्शन का है।
क्या है संदर्भ?
मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले की सिवनी मालवा तहसील में एक सेशंस कोर्ट ने मॉब लिंचिंग के मामले में 14 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। दरअसल, साल 2022 में गो-तस्करी के शक में नाजिर अहमद की मॉब लिंचिंग की गई थी और उसकी इस हिंसक घटना में मौत हो गई थी। इस घटना को लेकर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ADJ) तबस्सुम खान की अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। पूरी रिपोर्ट को यहां पर पढ़ा जा सकता है।
अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को 26 हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि ‘गौरक्षकों’ के नाम पर वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। असल में वीडियो राजस्थान का है और एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का है। दरअसल, राजस्थान विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) से जुड़ा एक कार्यक्रम हो रहा था, तभी वहां पर उसका विरोध करने के लिए एनएसयूआई कार्यकर्ता भी पहुंचे थे। ये वीडियो उसी विरोध-प्रदर्शन के दौरान का है।
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