नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के करोड़ों रुपये गायब होने का आरोप लगा है। इससे जोड़कर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक व्यक्ति को चढ़ावे के रुपये उठाकर पुजारी को देते हुए देखा जा सकता है। कुछ यूजर्स इस वीडियो को शेयर कर दावा कर रहे हैं कि यह वीडियो अयोध्या के राम मंदिर में पुजारी द्वारा चढ़ावे की राशि ‘चुराने’ का है।
विश्वास न्यूज की जांच में पता चला कि वायरल वीडियो बेंगलुरु के ‘गली आंजनेय स्वामी’ मंदिर का है। सितंबर 2024 में वहां का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक व्यक्ति को रुपये उठाते हुए देखा गया था। इस वीडियो का अयोध्या के राम मंदिर से कोई संबंध नहीं है।
क्या है वायरल पोस्ट?
इंस्टाग्राम यूजर ‘iindian_affairs’ ने 16 जून 2026 को एक वीडियो शेयर (आर्काइव लिंक) किया है। इस पर लिखा है, “राम मंदिर 200 करोड़ का अब तक का बड़ा खुलासा -सीसीटीवी ने खोली सबकी पोल, अयोध्या। मंदिर के CCTV में पुजारी कथित तौर पर दान का पैसा छिपाते दिखे।”

पड़ताल
वायरल दावे की जांच के लिए हमने वीडियो का कीफ्रेम निकालकर उसे गूगल लेंस से सर्च किया। ‘लोकमत टाइम्स’ के इंस्टाग्राम अकाउंट से 1 अक्टूबर 2024 को एक वीडियो को पोस्ट किया गया था,। जिसमें वायरल क्लिप को भी देखा जा सकता है। यहां मौजूद जानकारी के अनुसार, वीडियो बेंगलुरु के गली आंजनेय स्वामी मंदिर का है, जिसमें मंदिर के दो सदस्यों को दान के रुपये उठाते हुए देखा जा सकता है।

इस आधार पर कीवर्ड से सर्च करने पर हमें ‘बंगलौर मिरर’ की वेबसाइट पर 27 सितंबर 2024 को छपी एक खबर का लिंक मिला। इसमें घटना के सीसीटीवी फुटेज की एक अन्य तस्वीर अपलोड की गई है। खबर के अनुसार, “गली आंजनेय स्वामी मंदिर में दान की चोरी की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें दिखाया गया है कि दान गिनने वाले सुपरवाइजरों में से एक, बैठे हुए एक आदमी को कैश का बंडल देता है, जो गिनती की प्रक्रिया की देखरेख करने के लिए जिम्मेदार होने के बावजूद उसे अपनी जेब में रख लेता है। इस मामले में मंदिर के मुख्य पुजारी रामचंद्र ने कहा कि चढ़ावे में हेराफेरी की यह घटना एक साल से भी पहले हुई थी। मंदिर प्रशासन ने एग्जीक्यूटिव कमेटी के दो सदस्यों को मंदिर के पैसे में हेराफेरी करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया है और दोषी पाए गए दो रसोइयों से मंदिर नहीं आने को कहा है।”

‘इंडिया टुडे’ की वेबसाइट पर 14 जुलाई 2025 को छपी रिपोर्ट के मुताबिक, “सितंबर 2024 में चढ़ावे में से रुपये चुराने के आरोपों के बाद गली अंजनेय स्वामी मंदिर चर्चा में आया था। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई थी। अब भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और मंदिर में चोरी के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर मंदिर को पांच साल के लिए अपने नियंत्रण में ले लिया है।” इस रिपोर्ट में एक अन्य सीसीटीवी फुटेज के कीफ्रेम को भी देखा जा सकता है।

क्या है संदर्भ?
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में से करोड़ों रुपये गायब होने का आरोप लगाया था। ‘दैनिक जागरण’ की वेबसाइट पर 13 जून 2026 को छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, ”इन आरोपों की जांच के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया था। इसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को शामिल किया गया है। इस टीम को सात दिन में अंतरिम रिपोर्ट और 15 दिन में अंतिम रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।”
‘आजतक’ की वेबसाइट पर 16 जून 2026 को छपी एक खबर के मुताबिक, अयोध्या के राम मंदिर में दान के लिए मंदिर प्रांगण में करीब 40 पेटियां हैं। रात में मंदिर ट्रस्ट के कमरे में दान पेटियों को खोला जाता है। पेटी से निकले नोटों की गड्डियां बनाई जाती हैं और फिर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के अधिकारी की मौजूदगी में इन्हें जमा कराया जाता है। दान पेटी खुलने वाली जगह पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और वहां 50 कर्मचारी काम करते हैं। इनमें से 24 एक निजी कंपनी के होते हैं, जबकि इनकी निगरानी के लिए ट्रस्ट के 12 कर्मचारी होते हैं।
इस बारे में हमने अयोध्या में ‘दैनिक जागरण’ के ब्यूरो चीफ रमाशरण अवस्थी से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि चोरी के आरोपों को लेकर गठित एसआईटी अपनी जांच कर रही है। वायरल वीडियो जैसी कोई सीसीटीवी फुटेज सामने नहीं आई है।
वीडियो को राम मंदिर का बताकर शेयर करने वाले इंस्टाग्राम यूजर की प्रोफाइल को अंत में हमने स्कैन किया। मई 2026 में बने इस अकाउंट के 14 हजार से अधिक फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में से राशि चोरी होने के आरोप लगने के बाद एसआईटी इसकी जांच कर रही है। हालांकि, वायरल वीडियो बेंगलुरु के मंदिर में हुई घटना का है और पुराना भी है।
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