नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद राज्य में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों को वापस बांग्लादेश भेजे जाने की कार्रवाई के बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में लोगों से भरी ट्रेन को देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि बंगाल में डिटेंशन कैंप में भेजे जाने के डर से राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी अपने देश वापस भाग रहे हैं।
विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को भ्रामक पाया। यह सही है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमावर्ती जिलों के हिरासत केंद्रों से करीब 5000 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेजा है, लेकिन वायरल हो रहा यह वीडियो पश्चिम बंगाल का नहीं, बल्कि बांग्लादेश का है।
क्या हो रहा है वायरल?
सोशल मीडिया यूजर ‘@RajputRanjanaa’ ने 3 जून 2026 को एक्स पर वायरल पोस्ट (आर्काइव लिंक) शेयर करते हुए लिखा, “पश्चिम बंगाल में सरकार बदलते ही बांग्लादेशियों के अंदर डिटेंशन कैंप में जाने का खौफ देखिये। यह पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच में चलने वाली ट्रेन है।
यह ट्रेन जब पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश की पहले स्टेशन पर पहुंची तब इस ट्रेन का आप नजारा देखिए बांग्लादेश की मीडिया अभी बड़ी तादाद में इसकी कवरेज करने के लिए पहुंची है। अब बांग्लादेश के एक मंत्री कह रहे हैं कि हमारे एक करोड़ लोग भारत में अवैध रूप से रहते हैं अगर इसमें से 20% लोग भी बांग्लादेश में आ जाएंगे तो हमारा पूरा सिस्टम चरमरा जाएगा।”
सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इस वीडियो को समान दावे के साथ शेयर किया है।
पड़ताल
वायरल वीडियो में यह दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में सरकार बदलते ही बांग्लादेशियों के अंदर डिटेंशन कैंप में भेजे जाने का खौफ बढ़ गया है और वे पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच चलने वाली ट्रेनों के जरिए राज्य छोड़कर भाग रहे हैं।
वायरल वीडियो में किए गए दावे की जांच की शुरुआत हमने न्यूज सर्च से की और सर्च में हमें ऐसी कई रिपोर्ट्स मिलीं, जिनमें बांग्लादेश के सीमावर्ती जिलों के हिरासत केंद्रों से लगभग पांच हजार अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजे जाने का जिक्र है। ‘आकाशवाणी न्यूज’ की आठ जून की रिपोर्ट के मुताबिक, “पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य के सीमावर्ती जिलों के हिरासत केंद्रों से लगभग 4800 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा जा चुका है और इन केंद्रों से 836 व्यक्तियों का प्रत्यर्पण होगा।”
कई अन्य रिपोर्ट्स में भी इसका जिक्र मिला।
यानी पश्चिम बंगाल के हिरासत केंद्रों में रह रहे अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, “सरकार ने केंद्र सरकार के कानून के अनुसार उन अवैध प्रवासियों को निर्वासित करना शुरू कर दिया है, जो नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे में नहीं आते हैं। अवैध प्रवासियों को सीधे बीएसएफ के सुपुर्द किया जा रहा है।”
इसके बाद हमने वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की। ओरिजिनल सोर्स को ढूंढने के लिए हमने इसके की-फ्रेम्स को ध्यान से देखा, जिसमें कई फ्रेम्स में हमें ट्रेन की बोगियों पर ‘बांग्लादेश रेलवे’ और ‘इंटरसिटी’ लिखा नजर आया। यानी यह ट्रेन बांग्लादेश के भीतर चलने वाली एक लोकल ट्रेन है। एक फ्रेम में ट्रेन का नाम ‘Chilahati Express-806/805’ लिखा हुआ दिखा।

बांग्लादेशी वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, यह ट्रेन ढाका से चिलाहाटी के बीच चलने वाली इंटरसिटी ट्रेन है।
न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और बांग्लादेश के बीच तीन ट्रेनें चलती हैं, जिनमें सर्वाधिक हालिया ट्रेन मिताली एक्सप्रेस है। इसकी शुरुआत 2022 में की गई थी। इससे पहले दोनों देशों के बीच मैत्री एक्सप्रेस और बंधन एक्सप्रेस चल रही हैं।
हालांकि,इन तीनों ट्रेनों का परिचालन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है।
पांच अगस्त 2024 की ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना के इस्तीफे के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच की ट्रेन सेवा को स्थगित कर दिया गया है और अभी तक इस सेवा को बहाल नहीं किया गया है।
इसके बाद हमने वायरल वीडियो के ओरिजिनल सोर्स को ढूंढने के लिए इसके की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च किया। इस सर्च में हमें यह वीडियो ‘RailNews24’ फेसबुक यूजर की प्रोफाइल पर मिला, जिसमें इसे बकरीद त्योहार पर चलने वाली ट्रेन बताया गया है।
वायरल वीडियो को लेकर हमने बांग्लादेश के स्थानीय फैक्ट चेक तौसिफ अकबर से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया, “यह बांग्लादेश की लोकल इंटरसिटी ट्रेन का पुराना फुटेज है। इसमें ईद की छुट्टियों के दौरान भारी भीड़भाड़ के समय की एक लोकल इंटरसिटी ट्रेन नजर आ रही है।”
वायरल वीडियो को शेयर करने वाले यूजर को एक्स पर करीब 50 हजार से अधिक लोग फॉलो करते हैं।
क्या है संदर्भ?
पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के साथ ही सीमा से सटे इलाकों में रहने वाले अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
बीबीसी हिंदी की रिपोर्ट के मुताबिक, “पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सत्ता में आते ही बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाको में कथित बांग्लादेशी घुसपैठिये बताए जाने वालों को वापस भेजे जाने का सिलसिला शुरू हो गया है. पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम के दायरे में न आने वाले 4,800 कथित घुसपैठियों को पहले ही बांग्लादेश भेज दिया गया है. एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि इसके अतिरिक्त 836 लोगों को होल्डिंग सेंटरों में रखा गया है और इन्हें पश्चिम बंगाल सरकार सीमा पार ‘पुशबैक’ करेगी.”
निष्कर्ष: डिटेंशन कैंप में भेजे जाने के डर से भारत और बांग्लादेश के बीच चलने वाली ट्रेनों से अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के पश्चिम बंगाल छोड़कर भागने के दावे से वायरल हो रहा वीडियो भ्रामक है। वायरल वीडियो बकरीद के मौके पर बांग्लादेश के भीतर चलने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस से लोगों के आवागमन का है। हालांकि, यह बात सही है कि सरकार बदलने के बाद बंगाल के सीमावर्ती जिलों के हिरासत केंद्रों से अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश भेजा जा रहा है।
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