नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर दो गुटों के बीच लड़ाई का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर का है। यहां 6 मस्जिदों को जबरन ध्वस्त कर दिया गया, 52 मुसलमानों के घरों में आग लगा दी गई और उन्हें जिंदा जला दिया गया।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा गलत है। माहौल बिगाड़ने के इरादे से मनगढ़ंत और फर्जी पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। मेरठ में न तो 6 मस्जिदों को ध्वस्त किया गया और न ही किसी को जलाने की घटना वहां हुई है। वायरल हो रहा वीडियो असल में हापुड़ का है, जहां महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर शोभायात्रा निकाली जा रही थी। यह वीडियो उसी दौरान दो गुटों के बीच हुई पत्थरबाजी की घटना का है।
क्या हो रहा है वायरल?
फेसबुक यूजर ‘HudHud times’ ने 10 मई 2026 को वायरल वीडियो शेयर करते हुए अंग्रेजी में कैप्शन लिखा, “ब्रेकिंग, मेरठ शहर में मुसलमानों की 6 मस्जिदें ध्वस्त कर दी गईं और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री @myogiadityanath ने तथाकथित रूप से ईशनिंदा किया , जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। 52 मुस्लिम घरों में आग लगा दी गई और खबरों के मुताबिक कई मुसलमानों को जिंदा जला दिया गया।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें न तो मस्जिदों को ध्वस्त करने की कोई हालिया विश्वसनीय न्यूज रिपोर्ट मिली, न ही 52 मुसलमानों के घरों में आग लगाने और उन्हें जिंदा जला देने की। 52 घरों में आग लगाना और मस्जिदों को ध्वस्त करना बहुत बड़ी घटना है। अगर सच में इस तरह की कोई घटना हुई होती, तो उससे जुड़ी कोई न कोई न्यूज रिपोर्ट जरूर मौजूद होती।
वायरल वीडियो के बारे में जानने के लिए हमने इसके कीफ्रेम निकाले और उन्हें गूगल रिवर्स इमेज की मदद से सर्च किया। हमें वायरल वीडियो ‘bharat samachar tv’ नाम के यूट्यूब चैनल पर मिला। वीडियो को 9 मई 2026 को शेयर किया गया था। चैनल पर मौजूद जानकारी के अनुसार, “हापुड़ में महाराणा प्रताप जयंती पर दो पक्षों में हिंसक झड़प।”
प्राप्त जानकारी के आधार पर हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमें दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट ‘अमर उजाला’ की वेबसाइट पर मिली। इस रिपोर्ट को 10 मई 2026 को प्रकाशित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, हापुड़ के साठा चौरासी क्षेत्र में महाराणा प्रताप जयंती की शोभायात्रा के समापन के बाद गांव देहरा में पुलिस की मौजूदगी में हालात बिगड़ गए। ड्रोन और फोर्स तैनात होने के बावजूद करीब 20 मिनट तक जमकर पथराव हुआ। उपद्रवी घरों की छतों पर चढ़ गए और दुकानों में घुसकर तोड़फोड़ की। ग्रामीणों ने महिलाओं से अभद्रता और मारपीट का भी आरोप लगाया । रिपोर्ट में वायरल वीडियो के कीफ्रेम मौजूद हैं।

‘दैनिक जागरण’ की वेबसाइट पर 10 मई 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, “उत्तर प्रदेश के हापुड़ के साठा चौरासी क्षेत्र में महाराणा प्रताप की जयंती के मौके पर भव्य शोभायात्रा निकाली जा रही थी, लेकिन वहां का माहौल देखते ही देखते बिगड़ गया और तनावपूर्ण हो गया। कुछ युवकों के बीच मामूली कहासुनी ने पूरे माहौल को उपद्रव की आग में झोंक दिया। उपद्रवियों ने सड़क निर्माण के लिए डाले गए पत्थरों को हथियार बना लिया और आधे घंटे तक लगातार पथराव चला। वाहनों से लेकर दुकानों के शीशे चकनाचूर हो गए, प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ हुई और कई दुकानदारों ने लूटपाट के आरोप लगाए।”
पड़ताल के दौरान हमें दावे से जुड़ी एक पोस्ट हापुड़ पुलिस के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर मिली। पोस्ट को 10 मई 2026 को किया गया था। कैप्शन के अनुसार, “थाना धौलाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर ग्राम देहरा में शोभायात्रा के दौरान आपस में हुई पत्थरबाजी की घटना में संलिप्त 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार एवं संदेह के आधार पर 05 संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। इस सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक हापुड़ श्री कुंवर ज्ञानंजय सिंह का आधिकारिक वक्तव्य।”
अधिक जानकारी के लिए हमने मेरठ दैनिक जागरण के क्राइम रिपोर्टर लोकेश पंडित से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि मेरठ में इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है।
हमने वीडियो को लेकर हापुड़ के ब्यूरो चीफ धर्मपाल आर्या से संपर्क किया। उन्होंने भी हमें बताया कि वायरल वीडियो हापुड़ में हुई हिंसा का है। महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर शोभायात्रा निकाली जा रही थी। इसी दौरान दो पक्षों के बीच झड़प हो गई और करीब आधे घंटे तक पथराव होता रहा। यह वीडियो उसी हिंसा के दौरान का है।
क्या है संदर्भ?
साल 2025 में उत्तर प्रदेश के मेरठ में छह मजारों को तोड़ने का एक मामला सामने आया था। फलावदा थाना क्षेत्र में कुछ असामाजिक तत्वों ने करीब छह मजारों को तोड़ दिया था। मुस्लिम समुदाय ने इस घटना पर अपनी नाराजगी जताई थी और हंगामा किया था। एसडीम और सीओ ने मौके पर पहुंचकर मामला शांत करवाया था और कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया था। नगर पंचायत ने क्षतिग्रस्त मजारों को ठीक करवा दिया था। इस घटना के बाद पुलिस ने हाई अलर्ट भी जारी किया था।
अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले फेसबुक यूजर ‘’HudHud times’ के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को करीब आठ हजार लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि तोड़फोड़ और हिंसा करते लोगों के वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। माहौल बिगाड़ने के इरादे से मनगढ़ंत और फर्जी पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। मेरठ में न तो 6 मस्जिदों को ध्वस्त किया गया और न ही किसी को जलाने जैसी घटना वहां हुई है। वायरल हो रहा वीडियो असल में हापुड़ का है, जहां महाराणा प्रताप जयंती के मौके पर शोभायात्रा निकाली जा रही थी। यह वीडियो उसी दौरान दो गुटों के बीच हुई पत्थरबाजी की घटना का है।
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