नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की वजह से कार्गो (मालवाहक) जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है, जिसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखने लगा है। इसी संदर्भ में सोशल मीडिया पर कई आधिकारिक प्रोफाइल से यह दावा किया गया कि चीनी मुद्रा ‘युआन’ में ईरान को भुगतान करने के बाद भारत के कार्गो जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने दिया जा रहा है।
विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को फेक पाया। भारत और ईरान के बीच व्यापार भुगतान विशेष रूप से बनाई गई व्यवस्था, रुपया-रियाल भुगतान के माध्यम से होता है। अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से दोनों देश आपसी व्यापार भुगतान के लिए रुपया-रियाल मैकेनिज्म का इस्तेमाल करते हैं।
क्या है वायरल?
सोशल मीडिया यूजर ‘MEHF voice 2.0’ ने वायरल वीडियो पोस्ट (आर्काइव लिंक) करते हुए लिखा, “#BreakingNews भारतीय ऑयल टैंकर ने चीनी युआन में पेमेंट करके होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की इजाजत ले ली! ईरान की अनुमति से डॉलर को चकमा, चीन के साथ नया गठबंधन! दुश्मन घबरा गया, शेर-ए-ईरान का तूफान जारी! इस जंग में हिन्दोस्तान का मुसलमान ईरान के साथ हैं।”
सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने भारतीय ऑयल टैंकर्स के चीनी युआन में पेमेंट कर होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का दावा किया है।
जांच
अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से ईरान अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क ‘SWIFT’ से बाहर है और इस वजह से भारत, अमेरिकी डॉलर या यूरो में ईरान को भुगतान नहीं कर सकता है। 16 मई 2012 के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की रिलीज के मुताबिक, (जो तत्कालीन वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के राज्यसभा में लिखित जवाब पर आधारित है) भारत और ईरान के बीच व्यापार के लिए रुपया-रियाल भुगतान व्यवस्था बनाई गई है।
30 अप्रैल 2014 को जारी की गई DGFT की अधिसूचना संख्या 79 (RE 2013)/2009-2014 में स्पष्ट किया गया था कि ईरान को किए जाने वाले निर्यात का भुगतान भारतीय रुपयों में प्राप्त किया जा सकता है।
ईरान स्थित भारतीय दूतावास की ‘Potential for expanding India-Iran trade’ की रिपोर्ट के मुताबिक, “यूको बैंक और ईरान के उन बैंकों के बीच रुपये पेमेंट सिस्टम के बारे में जानकारी दी गई, जिन पर कोई पाबंदी नहीं है और जिनके यूको बैंक में वोस्त्रो (Vostro) अकाउंट हैं। उन्हें यह भी बताया गया कि भारत का आईडीबीआई (IDBI) बैंक भी जल्द ही ईरान के साथ रुपये में लेन-देन शुरू करेगा।”
गौरतलब है कि वोस्ट्रो अकाउंट एक ऐसा बैंक अकाउंट है, जो किसी विदेशी बैंक की ओर से किसी घरेलू बैंक द्वारा खोला जाता है।
लोकसभा में 26 मार्च 2012 को एक अतारांकित प्रश्न का उत्तर देते हुए तत्कालीन वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल के आयात के लिए रुपये में भुगतान को मंजूरी दी गई है।
2023 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने लोकसभा में प्रश्न संख्या 3442 के उत्तर में फिर से इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि भारत ने रूस और ईरान जैसे देशों के साथ रुपये में व्यापार करने के लिए विशेष मैकेनिज्म (Special Rupee Vostro Accounts – SRVA) को स्थापित किया है।
इस जवाब के मुताबिक, न केवल ईरान, बल्कि श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और रूस के बीच भी रुपया में ट्रेड होता है।
कई न्यूज रिपोर्ट्स में भी इसका जिक्र है। 20 मार्च 2022 की ‘ईटी एनर्जी वर्ल्ड’ की रिपोर्ट के मुताबिक, “ईरान ने भारत को सीधे तेल और गैस के निर्यात को आसान बनाने के लिए ‘रुपया-रियाल मैकेनिज्म’ को फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। इस मैकेनिज्म के ज़रिए, तीसरे पक्ष की बैंकिंग पाबंदियों और अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार किया जा सकेगा। यह मैकेनिज्म भारत को ईरानी तेल का भुगतान रुपये में करने की अनुमति देता है, जिसका उपयोग ईरान बाद में भारतीय सामान खरीदने के लिए करता है।”
यानी हमारी जांच से स्पष्ट है कि भारत और ईरान के बीच ट्रेड रुपया-रियाल मैकेनिज्म के जरिए होता है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, भारत मुख्य रूप से डॉलर, यूरो और रुपये में व्यापार करता है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए युआन में भुगतान किए जाने का दावा गलत नजर आता है।
इस मामले में आधिकारिक पुष्टि के लिए हमने विदेश मंत्रालय के आधिकारिक स्रोतों को चेक किया। भारतीय विदेश मंत्रालय के आधिकारिक फैक्ट चेक हैंडल से इस दावे का खंडन किया गया है।
क्या है संदर्भ?
युद्ध की वजह से भारत के कई जहाज होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हुए हैं और वहां से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। जहाजरानी मंत्रालय के मुताबिक, भारतीय झंडे वाले 22 जहाज अभी फारस की खाड़ी में है, जिनमें 6 एलपीजी टैंकर, एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक में केमिकल प्रोडक्ट, तीन कंटेनर शिप, दो बल्क कैरियर और एक ड्रेजर शामिल हैं।
14 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक, “भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच भारत के दो जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में कामयाब रहे हैं।”
रिपोर्ट के मुताबिक रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत आने वाले कुछ जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में कामयाब रहे हैं। दो भारतीय जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, होर्मुज स्ट्रेट को पार कर चुके हैं और अब भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।”
वायरल दावे को लेकर हमने बिजनेस स्टैंडर्ड के डिप्टी न्यूज एडिटर नीलकमल सुंदरम से संपर्क किया और उन्होंने बताया कि भारतीय जहाजों के युआन में भुगतान कर होर्मुज स्ट्रेट से निकलने का दावा गलत है।
भारत-ईरान व्यापार
भारत के डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय कारोबार 2.33 अरब डॉलर का रहा। वहीं, अप्रैल 2023 से जुलाई 2023 के बीच दोनों देशों के बीच 0.66 अरब डॉलर का द्विपक्षीय कारोबार हुआ।
ईरान को भारत के मुख्य निर्यात में बासमती चावल, चाय, चीनी, फल, दवाएं/फार्मास्यूटिकल्स, सॉफ्ट ड्रिंक्स और दालें आदि शामिल हैं। वहीं, ईरान से भारत के मुख्य आयात में सैचुरेटेड मेथनॉल, पेट्रोलियम बिटुमेन, सेब, लिक्विफाइड प्रोपेन, सूखी खजूर, ऑर्गेनिक और इन-ऑर्गेनिक रसायन और बादाम आदि शामिल हैं।
वायरल पोस्ट को शेयर करने वाले यूजर को फेसबुक पर करीब 600 से अधिक लोग फॉलो करते हैं और जांच किए जाने तक इस पोस्ट को दो हजार से अधिक लाइक्स मिले हैं और करीब सौ से अधिक बार रीपोस्ट किया गया है। ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध से संबंधित अन्य वायरल दावों की फैक्ट चेक रिपोर्ट्स को यहां पढ़ा जा सकता है।
निष्कर्ष: होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकलने के लिए भारतीय ऑयल टैंकर्स के चीनी मुद्रा में पेमेंट किए जाने का दावा फेक है। भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय कारोबार का भुगतान रुपया-रियाल सिस्टम के तहत होता है।
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