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‘एआई के नैतिक उपयोग और साक्षरता’ सम्‍मेलन में एक्सपर्ट्स ने रखी अपनी राय, डीपफेक को पहचानने के तरीके भी बताए

नई दिल्‍ली। जागरण न्‍यू मीडिया के ‘एआई के नैतिक उपयोग और साक्षरता’ सम्‍मेलन में हुए पैनल डिस्कशन में एक्सपर्ट्स ने वरिष्ठ नागरिकों और एआई में तालमेल बैठाने के साथ ही, डीपफेक को पहचानने के तरीकों पर अपनी बातें रखीं। इस दौरान एक्सपर्ट्स ने साइबर क्राइम से निपटने के तरीकों पर भी अपने विचार रखे। 

डॉ. राकेश उपाध्याय, हेड, हिंदी पत्रकारिता विभाग, आईआईएमसी

इस पैनल डिस्कशन का संचालन जागरण न्‍यू मीडिया के एडिटर इन चीफ राजेश उपाध्‍याय ने किया। इसकी शुरुआत उन्होंने आईआईएमसी के हिंदी पत्रकारिता विभाग के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. राकेश उपाध्‍याय से उनकी राय पूछकर की। राकेश उपाध्याय ने कहा कि बेसिक्स नहीं बदलते हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी आने से स्टूडेंट्स के लिए सहूलियतें बढ़ जाती हैं। अगर वे स्क्रिप्ट लिखते हैं और एआई को ग्रामर चेक करने का प्रॉम्प्ट देते हैं, तो कॉपी सही होकर मिल जाती है। उन्होंने एआई को फ्रेंड बताते हुए कहा कि स्टूडेंट्स को मेहनत तो करनी पड़ेगी। एआई उनको यह आइडिया दे सकता है कि कैसे लिखा जाए? इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मैसेज को फॉरवर्ड करने से पहले उसको चेक कर लेना चाहिए। इसके लिए गूगल सर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है।  

मेजर विनीत कुमार, फाउंडर, साइबरपीस

इस दौरान ‘साइबरपीस’ के फाउंडर, मेजर विनीत कुमार ने साइबर पीस का अर्थ समझाते हुए कहा कि लोग अब क्राइम से बढ़कर साइबर वॉरफेयर की बात कर रहे हैं। हम साइबर शांति कैसे लाएं, ताकि सभी देशों में शांति का माहौल बना रहे और लोग एक-दूसरे को साइबर अटैक से नुकसान नहीं पहुंचाएं, यही है साइबर पीस। हालांकि, आम लोगों के लिए इसका मतलब यह है कि वे बिना डरे तकनीक का इस्तेमाल कैसे करें? ट्रेनिंग से ऐसा संभव है। इससे लोग स्कैम या फ्रॉड से बच सकते हैं। साथ ही, उन्होंने एआई कंटेंट को चेक करने के लिए ‘हाइव मॉडरेशन’ टूल के बारे में जानकारी दी। इसमें कंटेंट को अपलोड करने से पता चल जाता है कि यह एआई है या नहीं। 

देविका मेहता, फैक्‍ट चेकर, विश्वास न्‍यूज

कार्यक्रम में विश्वास न्‍यूज की फैक्‍ट चेकर देविका मेहता ने कहा कि सभी डीपफेक्स बुरे नहीं होते हैं। एआई टेक्नोलॉजी से चेहरे या आवाज को क्लोन करके एजुकेशन के मकसद से भी बनाया जा सकता है, लेकिन जब गलत लोग इसका दुरुपयोग करते हैं तो यह तकनीक हानिकारक हो जाती है। स्कैमर्स ह्यूमन इमोशन का प्रयोग करके लोगों से फ्रॉड करने की कोशिश करते हैं। लिप सिंकिंग (होंठ का तालमेल) और आई एक्सप्रेशन्स (आंखों के हाव-भाव) को देखकर डीपफेक्स को पहचाना जा सकता है। साथ ही उन्होंने विश्वास न्यूज के कॉन्सेप्ट ‘sure’ का जिक्र करते हुए कहा, ”S फॉर see, U फॉर अंडरस्टैंड, R फॉर री-चेक और E फॉर एग्जीक्यूट।” देविका ने कहा कि पहली बार देखने पर ही कोई भी पोस्ट शेयर न करें। पहले उसको समझें। फिर 7 सेकंड का रूल फॉलो करें और 7 सेकंड तक अपने थॉट्स को होल्ड करें। 

अर्निका सिंह, डायरेक्टर, प्रोगाम्स, पॉलिसी एंड रिसर्च, सोशल एंड मीडिया मैटर्स

प्रोगाम्स, पॉलिसी एंड रिसर्च की डायरेक्‍टर अर्निका सिंह ने सम्मेलन में इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सीनियर सिटीजन के लिए डिजिटल लिटरेसी अच्छी है या गलत, यह हम और आप तय नहीं करेंगे। उन्हीं से पूछना चाहिए कि उनकी प्रॉब्लम क्या है और उसका समाधान भी उनके पास ही है। उनको देखना है कि वह बच्चों को कैसे गाइड कर सकते हैं। हालांकि, यह कोशिश भी नहीं होनी चाहिए कि सभी सीनियर सिटिजन्‍स को ‘टेक गुरु’ बना दिया जाए। ऐसे ही सभी बच्चों को फिलॉसफर्स नहीं बना सकते हैं। साथ ही, उन्होंने ऑनलाइन गेमिंग को लेकर कहा कि इसमें कुछ खतरे होते हैं, जिनसे सावधान रहना चाहिए। 

हम भारत के एआई परिवर्तन को सशक्त बनाना चाहते हैं: अदिति चतुर्वेदी

गूगल इंडिया में प्लेटफॉर्म और डिवाइस पोर्टफोलियो के लिए सरकारी मामलों और सार्वजनिक नीति की प्रमुख, अदिति चतुर्वेदी ने इस कार्यक्रम में कहा कि वे (गूगल) भारत के एआई परिवर्तन को सशक्त बनाना चाहते हैं। हम निश्चित रूप से भारत की आर्थिक वृद्धि में तेजी ला रहे हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जो सबसे महत्वपूर्ण है, जिससे हमारी आर्थिक वृद्धि बढ़ सकती है और वह है, भरोसे की। 

अदिति चतुर्वेदी, गूगल इंडिया में प्लेटफॉर्म और डिवाइस पोर्टफोलियो के लिए सरकारी मामलों और सार्वजनिक नीति की प्रमुख

भरोसा ही जिम्मेदार इनोवेशन की नींव रखता है: हर्ष ढांड

कार्यक्रम के दौरान गूगल एपीएसी के ‘जेन-एआई एंड रिसर्च पार्टनरशिप’ के प्रमुख हर्ष ढांड ने वीडियो स्टेटमेंड में कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि भरोसा ही जिम्मेदार इनोवेशन की नींव रखता है। चाहे आप बेंगलुरु के छात्र हों या भोपाल के रिटायर व्यक्ति हों। हम चाहते हैं कि आपका ऑनलाइन अनुभव ऐसा हो जो डिफॉल्ट रूप से सुरक्षित हो और डिजाइन द्वारा निजी हो। डिजीकवच जैसी पहलों के माध्यम से हमने अपने यूजर्स को शिक्षित और सशक्त बनाने के साथ-साथ हजारों करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी को टाला है। जागरण न्यू मीडिया और विश्वास न्यूज़ के साथ हमारी साझेदारी ऑनलाइन सुरक्षा के प्रति हमारे प्रयासों का एक परिवर्तनकारी हिस्सा है। 

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