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Fact Check: डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने  की दो अलग खबरों को हालिया बताते हुए किया जा रहा वायरल

नई दिल्‍ली (विश्वास न्यूज)। एक खबर की कटिंग सोशल मीडिया पर एक बार फिर से वायरल हो रही है, जिसमें लिखा है कि मुस्लिमों की भीड़ ने संविधान के निर्माता और आजाद भारत के पहले कानून मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर की मूर्ति तोड़ी और दलितों को पीटा। खबर की इसी कटिंग के साथ जमीन में गिराए गए डॉ. आंबेडकर की गोल्डन रंग के स्टेचू की तस्वीर भी शेयर की जा रही है और दावा किया जा रहा है कि यह घटना हाल ही में हुई है।

विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल अखबार की कटिंग साल 2019 की है, जो देवरिया के एक मामले से सम्बंधित है। वहीं, दूसरी तस्वीर हैदराबाद में 2019 में हुए एक दूसरे मामले से जुड़ी हुई है। दो पुरानी तस्‍वीरों को अब नया बताते हुए भ्रामक दावे के साथ फैलाया जा रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट में ?

फेसबुक यूजर ‘अनिकेत सिंह बरदाडीह’ ने 20 जनवरी को वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा हुआ है, “मुस्लिमों की भीड़ ने आंबेडकर की मूर्ति तोड़ी, दलितों को पिटा। आरोपी रहमत अली ने घर में घुसकर दलित किशोरी से की छेड़खानी और उसके दलितों को मि मोहब्बत का त भाईचारा मुस्लिमों की भीड़ ने आंबेडकर की मूर्ति तोड़ी, दलितों को पिटा आरोपी रहमत अली ने घर में घुसकर दलित किशोरी से की छेड़खानी अब भीम आर्मी चन्द्रशेखर कोई दलित हितेशी नही बोलेगा भेज देना आका को।”

पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल

अखबार की यह कटिंग इससे पहले भी सामान दावे के साथ वायरल हो चुकी है। पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने गूगल लेंस के जरिए इस कटिंग को कीवर्ड के साथ सर्च किया। सर्च में हमें ‘अमर उजाला डॉट कॉम’ पर एक पुरानी खबर मिली। इस खबर और वायरल खबर का कंटेंट एक जैसा ही था। 21 अप्रैल 2019 की खबर के अनुसार, “घर में घुसकर किशोरी से छेड़खानी करने के विरोध पर कुछ लोगों ने अनुसूचित जाति की बस्ती में घुसकर जमकर उत्पात मचाया। किशोरी और उसके घरवालों की पिटाई की। बस्ती में लगी डॉ. आंबेडकर प्रतिमा तोड़ दी। पिटाई से करीब 20 लोग जख्मी हुए। घटना गौरी बाजार के महुअवां गांव की है। पीड़ितों ने थाने पहुंचकर हंगामा किया। केस दर्ज कराने और प्रतिमा की मरम्मत की मांग को लेकर गुस्से का इजहार किया।”

इसी बुनियाद पर सर्च किये  जाने पर हमें ‘जागरण डॉट कॉम’ पर इस मामले से जुड़ी खबर मिली। 21 अप्रैल 2019 की इस खबर में बताया गया, “देवरिया जनपद के गौरीबाजार थानाक्षेत्र के करजहां महुअवां गांव में अपनी करतूत से खाकी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। घटना के तत्काल बाद यदि पुलिस सक्रिय हुई होती तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं होती। घटना के बाद दलित बस्ती की महिलाएं डरी, सहमी और बदहवास हैं। पूछने पर काफी मुश्किल से बात करने को तैयार होती हैं। घटना के बारे में बताते हुए महिलाएं फफक पड़ती हैं।”

जब यह पोस्ट इससे पहले वायरल हुई थी, तब विश्‍वास न्‍यूज ने दैनिक जागरण, देवरिया के प्रमुख महेंद्र त्रिपाठी से संपर्क किया था। उन्‍होंने जानकारी देते हुए बताया था कि वायरल पोस्‍ट वाली घटना काफी पुरानी थी।

दूसरी तस्वीर

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल पोस्ट में इस्तेमाल किये जा रहे डॉ. आंबेडकर के सुनहरे रंग की क्षतिग्रस्त प्रतिमा की तस्वीर को गूगल लेंस के जरिए सर्च किया। सर्च में हमें यह तस्वीर कई न्यूज वेबसाइट्स पर मिली। ‘डेक्कन क्रॉनिकल’ की 14 अप्रैल 2019 की खबर के अनुसार, हैदराबाद में डॉ. बी.आर. आंबेडकर की जयंती समारोह से एक दिन पहले ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) के कर्मचारियों ने पंजागुट्टा में बिना अनुमति लगाए गई मूर्ति को हटा दिया और कथित तौर पर कचरा ढोने वाले ट्रक की मदद से उसे जवाहरनगर डंप यार्ड में फेंक दिया। रास्ते में मूर्ति टूट गई।

वहीं, ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की 17 अप्रैल 2019 की खबर की खबर में बताया गया, “पंजागुट्टा में डॉ. आंबेडकर की मूर्ति को गिराए जाने के बाद यह विवाद शहर के कई हिस्सों में फैल गया है। कई दलित संगठनों ने मूर्ति को वापस लगाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। मडिगा रिजर्वेशन परोटा समिति (MRPS) ने भूख हड़ताल का ऐलान भी किया और विरोध किया कि ग्रेटर हैदराबाद नगर निगम (GHMC) कर्मचारियों का यह कदम अनैतिक था।”

इस मामले से जुड़ी खबरें ‘एनडीटीवी‘ और  ‘डीएनए इंडिया‘ की वेबसाइट्स पर भी पढ़ी जा सकती हैं।

अब बारी थी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर ‘अनिकेत सिंह बरदाडीह’ सोशल स्कैनिंग करने की। हमने पाया कि यूजर ने इस पोस्ट को ‘पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ’ नाम के पेज पर पोस्ट किया था। वहीं, यूजर को दो हजार से ज्‍यादा लोग फेसबुक पर फॉलो करते हैं।

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