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Fact Check : भारतीय करेंसी से नहीं हटाया गया महात्‍मा गांधी का नाम और तस्‍वीर, फर्जी पोस्‍ट वायरल

नई दिल्‍ली (विश्‍वास न्‍यूज)। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्‍लेटफॉर्म पर दो भारतीय करेंसी की तस्‍वीर वायरल हो रही है। एक हजार के नोट पर सरदार वल्लभभाई पटेल और पांच सौ के नोट पर सुभाष चंद्र बोस बने हुए हैं। इसे वायरल करते हुए दावा किया जा रहा है मोदी सरकार ने भारतीय नोटों पर से महात्‍मा गांधी का नाम और तस्‍वीर हटाकर सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस की तस्‍वीर लगवा दी है।

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच की। यह फर्जी साबित हुई। पीएम मोदी की ओर से ऐसा कोई बदलाव नहीं किया है। वायरल नोट की तस्‍वीर एआई टूल की मदद से बनाई गई हैं।

क्‍या हो रहा है वायरल

फेसबुक यूजर Usha Vardhan ने 30 दिसंबर 2025 को एक तस्‍वीर को पोस्‍ट करते हुए दावा किया, “नववर्ष की शुरुआत में आपको शायद भारतीय मुद्रा में यह तस्वीरें दिख सकती है। मोदी है तो सब मुमकिन है।”

तस्‍वीर के ऊपर लिखा गया, “भारत के नई करेंसी नोट 500 और 1000 के 1 जनवरी 2026 से होंगे लागू। नोट से महात्‍मा गांधी का नाम और फोटो हटाया गया।”

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों लिखा गया। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं। पोस्‍ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।

पड़ताल

यदि केंद्र सरकार या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भारतीय करेंसी में कुछ भी बदलाव करती, तो यह बहुत बड़ी खबर होती। हालांकि, हमें एक भी ऐसी खबर नहीं मिली, जो वायरल दावे की सत्‍यता की पुष्टि करती हो।

जांच को आगे बढ़ाते हुए हमने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की वेबसाइट को स्‍कैन किया । नोटबंदी की घोषणा के बाद आरबीआई ने करेंसी मार्केट में 500 रुपये और 2000 रुपये के नए नोटों को जारी किया था। आरबीआई की वेबसाइट पर नोटबंदी के बाद जारी किए गए सभी नई सीरीज के नोटों के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध है। 2016 में आरबीआई ने 500 और 1000 के नोट को बंद कर दिया था।

एक जनवरी 2026 के एक प्रेस नोट के अनुसार, दो हजार रुपए के बैंक नोट को पिछले साल प्रचलन से बाहर कर दिया गया है, लेकिन कानूनी रूप से इसकी वैधता बनी हुई है।

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल तस्‍वीर की जांच करने के लिए एआई कंटेंट चेक करने वाले ऑनलाइन टूल हाइव मॉडेरेशन का इस्‍तेमाल किया। यहां चेक करने पर 99 फीसदी से ज्‍यादा इस बात की संभावना जताई गई कि वायरल तस्‍वीर एआई से बनाई गई है।

विश्‍वास न्‍यूज ने पड़ताल के दौरान गूगल डीपमाइंड के Synth ID टूल का इस्‍तेमाल किया। यहां वायरल तस्‍वीर को सर्च करने पर नतीजों से पता चला कि यह तस्‍वीर एआई की मदद से बनाई गई है। नतीजे को नीचे देखा जा सकता है।

विश्‍वास न्‍यूज ने गूगल डीपमाइंड के दूसरे टूल बैकस्‍टोरी का भी इस्‍तेमाल किया। इसके जेनAI एनालिसिस में बताया गया कि इस बात के पर्याप्‍त सबूत हैं कि वायरल तस्‍वीर को एआई का इस्‍तेमाल करते हुए बनाया गया है।

विश्‍वास न्‍यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए मुंबई स्थित वरिष्‍ठ बिजनेस पत्रकार कमल शर्मा से संपर्क किया। उनके साथ वायरल तस्‍वीर को शेयर की। उन्‍होंने इसे पूरी तरह फेक बताते हुए कहा कि यदि आरबीआई इतना बड़ा कोई फैसला करती, तो वह खबरों में सबसे पहले आता । वायरल तस्‍वीर फेक है।

निष्‍कर्ष : विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में वायरल पोस्‍ट पूरी तरह से गलत साबित हुई। एआई की मदद से तैयार तस्‍वीर के माध्‍यम से यह झूठ फैलाया गया कि मोदी सरकार ने भारतीय नोटों से महात्‍मा गांधी की तस्‍वीर हटा दी है।

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