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Fact Check : प्रयागराज में हुई घटना का पांच साल पुराना वीडियो अब वायरल

नई दिल्‍ली (Vishvas News)। प्रयागराज में महाकुंभ के आयोजन के बीच एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला को रोते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि प्रयागराज में कुछ लोगों ने एक लड़की का अपहरण करके गैंगरेप किया है। इस मामले में पुलिस केस दर्ज नहीं कर रही है।

विश्‍वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की जांच की। यह भ्रामक साबित हुई। प्रयागराज की पुरानी घटना के वीडियो को अभी का बताकर अफवाह फैलाई जा रही है। पुलिस की ओर से भी एक्‍स पर बताया गया कि प्रकरण पांच साल पुराना है।

क्‍या हो रहा है वायरल

फेसबुक यूजर Akhilesh Patel ने 17 फरवरी को एक वीडियो को अपलोड करते हुए दावा किया, “रोज 7-8 लड़के आते हैं और हमारे घरों के बाहर खड़े रहते हैं, वे एक लड़की को उठाते हैं और उसके साथ सामूहिक बलात्कार करते हैं। पुलिस अधिकारी ठाकुर है, वह एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर देता है क्योंकि आरोपी ठाकुर हैं। यह घटना यूपी के इलाहाबाद की है। जहा राम राज्य होने के दावे किये जा रहे है!”

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों देखा जा सकता है। इसे सच मानकर कई यूजर्स शेयर कर रहे हैं।

पड़ताल

विश्‍वास न्‍यूज ने सबसे पहले वायरल वीडियो के कई कीफ्रेम्‍स निकाले। फिर इन्‍हें गूगल लेंस टूल के जरिए सर्च किया। हमें वायरल वीडियो से जुड़ी कई सोशल मीडिया पोस्‍ट मिली। वीडियो के ग्रैब का इस्‍तेमाल करते हुए एक एक्‍स हैंडल ने 16 जनवरी 2020 को एक पोस्‍ट किया था। इसमें वायरल दावे वाली बात अंग्रेजी में लिखी गई थी।

सर्च के दौरान वायरल वीडियो 2021 को अपलोड मिला। एक एक्‍स हैंडल ने इस वीडियो को 27 फरवरी 2021 को पोस्‍ट करते हुए लिखा, “रोज 7,8 लड़के आते है घरों के बाहर खड़े रहते है,वो एक लड़की को उठाते है और सामूहिक बलात्कार करते है,पुलिस अधिकारी ठाकुर है,वह FIR दर्ज करने से इंकार कर देता है, क्योकिं आरोपी उसी समुदाय से है! यह शर्मनाक घटना UP के इलाहाबाद की है।”

पड़ताल के दौरान डीसीपी यमुना नगर प्रयागराज के एक्‍स हैंडल से वीडियो को अब वायरल करने वाले यूजर को जवाब देते हुए बताया गया, “उक्त प्रकरण 05 वर्ष पुराना है। जिसमें थाना मेजा में अभियोग पंजीकृत है। घटना से संबंधित समस्त अभियुक्तगणों को पूर्व में ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। कृपया पुरानी घटना को नए रिफ्रेंस में न चलाए।”

अब तक की पड़ताल से यह साबित हो गया कि वायरल वीडियो कम से कम पांच साल पुराना है। इसे अब वायरल करके अफवाह फैलाने की कोशिश की जा रही है।

विश्‍वास न्‍यूज ने पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए दैनिक जागरण, प्रयागराज के संपादकीय प्रभारी राकेश पांडेय से संपर्क किया। उनके साथ वायरल पोस्‍ट को शेयर किया। उन्‍होंने भी जानकारी देते हुए इसे पांच साल पुराना बताया।

जांच के अंत में हमने अखिलेश पटेल नाम के यूजर की जांच की। इसी ने फेसबुक पर पुराने वीडियो को पोस्‍ट किया था। सोशल स्‍कैनिंग में पता चला कि यूजर को 24 हजार से ज्‍यादा लोग फॉलो करते हैं।

निष्‍कर्ष : विश्‍वास न्‍यूज की पड़ताल में पता चला कि पांच साल पुरानी घटना से जुड़े वीडियो को अब वायरल करके झूठ फैलाया जा रहा है। हमारी जांच में वायरल पोस्‍ट भ्रामक साबित हुई।

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