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Fact Check: कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के नाम पर वायरल युवती की यह तस्वीर AI से बनी है

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ भले ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) का धरना खत्म हो गया हो, लेकिन अभी भी कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इससे जुड़ी तस्वीर और वीडियो शेयर करके झूठ और भ्रम फैला रहे हैं। एक युवती की तस्वीर को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि यह प्रदर्शन के दौरान की है। इस तस्वीर के साथ न सिर्फ युवती के कपड़ों पर सवाल खड़ा किया जा रहा है, बल्कि कुछ यूजर्स इसे सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल करते हुए सीजेपी के पूरे आंदोलन पर भी सवाल खड़ा कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस तस्वीर को सच मानकर कुछ यूजर्स शेयर कर रहे हैं।

विश्वास न्यूज ने वायरल तस्वीर की जांच की। यह फर्जी साबित हुई। जांच में पता चला कि इसे बनाने में एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। विश्वास न्यूज ने कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कई सोशल मीडिया पोस्ट की पड़ताल की है। इन्हें यहां पढ़ा जा सकता है।

क्या है वायरल?

फेसबुक यूजर ‘Rajnish Kumar’ ने 26 जुलाई 2026 को एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “प्रदर्शन के नाम पर हिंदुओं की बेटियां अंग-प्रदर्शन कर रही हैं और इनका समर्थन वो समाज कर रहा है जो अपनी महिलाओं को बुर्के और हिजाब में बंद करके रखता है। हिन्दू समाज के नैतिक पतन को देखकर ये समाज अंदर ही अंदर खुश हो रहा है, क्योंकि ऐसी लड़कियां ही लव जिहाद का शिकार बनने वाली हैं। देखा जाए तो ये प्रदर्शन एक तरह से दीन की दावत देने का माध्यम बनने वाला है। अगर इस प्रदर्शन में इस्लाम, ईसाई या सिख धर्म को गाली दी जाती तो अभी तक गले कटने शुरू हो जाते लेकिन यहां सिर्फ हिन्दू धर्म को गाली दी जा रही है। हिंदुओं की बेटियां ऐसी गालियां दे रही हैं जिन्हें लड़के भी देने से शर्माते हैं। कितनी अजीब बात है कि इसका समर्थन वो लोग कर रहे हैं, जो नियमित रूप से मंदिर जाते हैं, तीर्थ स्थल यात्रा करते हैं और अपने घरों में धार्मिक आयोजन करते हैं। ऐसे लोग मोदी विरोध में इतने अंधे हो चुके हैं कि इनको ऑनलाइन खाना भेज रहे हैं, जिसमें से 90% खाना कूड़े में जा रहा है। गरीब आदमी से पैसे-पैसे के लिए लड़ने वाले यहां हज़ारो रुपये का खाना भेज रहे हैं। अगर ऐसे किसी आयोजन में इस्लाम को गाली दी जाती तो एक भी मुस्लिम यहां खाना नहीं भेजता और न ही इनका समर्थन करता। इतनी गद्दारी और बेशर्मी सिर्फ हिंदुओं में पाई जाती है। मेरा ऐसे हिंदुओं से अनुरोध है कि हिन्दू धर्म त्याग कर कोई दूसरा धर्म अपना लो, ताकि पता चले कि वास्तव में हिंदुओं की जनसंख्या कितनी है..।”

वायरल पोस्ट के कंटेंट को यहां ज्यों का त्यों लिखा गया है। इसके आर्काइव वर्जन को यहां देखा जा सकता है। इसे सच मानकर कई यूजर्स सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।

पड़ताल

विश्वास न्यूज ने सबसे पहले वायरल तस्वीर को गूगल लेंस टूल के जरिए स्कैन किया। यह तस्वीर हमें कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स के अलावा कहीं और नहीं मिली। सर्च के दौरान हमें सबसे पहले पोस्‍ट की गई यह तस्वीर ‘विशाल सोनी’ नाम के एक इंस्टाग्राम हैंडल पर मिली। इसे 23 जुलाई 2026 को शेयर करते हुए बताया गया कि यह तस्वीर उन्होंने एआई टूल की मदद से बनाई है। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। इस प्रोफाइल के परिचय में प्रीमियम रियलिस्टिक कंटेंट लिखा हुआ है। साथ में इस अकाउंट पर हमें महिलाओं की कई काल्पनिक तस्वीरें भी मिलीं।

विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए वायरल तस्वीर को ध्यान से जूम इन करके देखा। इसमें हमें साइन बोर्ड पर कुछ ऐसी विसंगतियां नजर आईं, जो एआई-निर्मित तस्वीरों में सामान्य होती हैं। साइन बोर्ड पर स्थानों के नाम में इस्तेमाल किए गए अक्षर पूरी तरह से गलत नजर आए। इससे हमें तस्वीर के फर्जी होने का शक हुआ।

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने वायरल फोटो को एआई डिटेक्शन टूल्स की मदद से चेक करना शुरू किया। सबसे पहले ‘साइट इंजन’ की मदद से फोटो को सर्च किया गया। साइट इंजन के एनालिसिस में 99 फीसदी तक तस्वीर के एआई से बने होने के संकेत सामने आए।

इसके बाद हमने ‘isitai’ का इस्तेमाल किया और इस टूल ने फोटो के एआई से बने होने की करीब 99 फीसदी संभावना जताई।

तस्वीर को हमने तीसरे टूल ‘undetectable.ai’ की मदद से भी सर्च किया । इस टूल ने भी फोटो के एआई से बने होने की संभावना जताई।

विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए एआई एक्सपर्ट अजहर माचवे से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि यदि तस्वीर को ध्यान से देखा जाए तो इसमें कई गलतियां नजर आएंगी। बाएं कंधे पर युवती के बाल सामान्य नहीं दिख रहे हैं। इसी तरह कुछ स्लोगन में अंग्रेजी की गलतियां भी नजर आ रही हैं। इसके अलावा साइन बोर्ड में भी खामियां हैं। इससे यह मालूम चलता है कि इस तस्वीर को बानाने में एआई का इस्तेमाल किया गया है।

विश्वास न्यूज ने जांच के अंत में इस तस्वीर को बनाने वाले इंस्टाग्राम यूजर विशाल सोनी से भी संपर्क किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर के नाम पर वायरल हो रही युवती की तस्वीर काल्पनिक है और यह उन्होंने ही बनाई है।

क्या है संदर्भ?

देश में परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन उनके इस्तीफे के साथ खत्म हो गया। यह प्रदर्शन 20 जून 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था। छात्रों के दबाव में आखिरकार 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री ने इस्तीफा दे ही दिया। ‘बीबीसी’ हिंदी की 25 जुलाई 2026 की एक खबर में इसके बारे में विस्तार से पढ़ा जा सकता है।

जांच के अंत में फर्जी पोस्ट करने वाले फेसबुक यूजर की जांच की गई। पता चला कि इस अकाउंट को 1,700 से ज्यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट 2019 में बनाया गया था। यूजर यूपी के हरदोई का रहने वाला है।

निष्कर्ष: विश्वास न्यूज की जांच में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन के नाम पर वायरल युवती की तस्वीर फर्जी साबित हुई। इसे एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

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