नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर एक व्यक्ति का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग शख्स के ऑफिस में आते हैं और इधर-उधर सर्च करना शुरू कर देते हैं। फिर उन्हें करीब दो लाख रुपये तक वहां पर मिलते हैं। वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि यह उत्तर प्रदेश के लखनऊ का वीडियो है। जहां पर राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर दो लाख की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल दावा भ्रामक है। असल में वायरल वीडियो हाल-फिलहाल में हुई घटना का नहीं, बल्कि करीब एक साल पहले हुई घटना का है।
क्या हो रहा है वायरल ?
फेसबु यूजर ‘सुनिल चाचा’ ने 20 फरवरी 2025 वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है, “लखनऊ से बड़ी खबर* राज्य कर के डिप्टी कमिश्नर दो लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार, विजिलेंस ने राज्य कर के डिप्टी कमिश्नर धनेंद्र पांडेय को किया गिरफ्तार, एक कंपनी को 20 लाख की जीएसटी रिफंड देने के बदले मांगे थे दो लाख रुपए, संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि ने की थी विजिलेंस हेल्पलाइन पर शिकायत।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए हमने वीडियो के कई कीफ्रेम निकाले और उन्हें गूगल रिवर्स इमेज के जरिए सर्च किया। हमें वायरल वीडियो पत्रिका न्यूज यूपी और भारत न्यूज जैसे यूट्यूब चैनल पर मिला। वीडियो को 27 मार्च 2024 को शेयर किया गया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, “लखनऊ में राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर धनेंद्र पांडेय को विजिलेंस की टीम ने रंगे हाथ दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।”
प्राप्त जानकारी के आधार पर हमने गूगल पर संबंधित कीवर्ड्स की मदद से सर्च किया। हमने दावे से जुड़ी एक रिपोर्ट अमर उजाला की वेबसाइट पर मिली। रिपोर्ट को 19 मार्च 2024 को प्रकाशित किया गया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, “विजिलेंस ने राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर धनेंद्र कुमार पांडेय को दो लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए क रंगे हाथों गिरफ्तार किया। वह एक कंपनी से 20 लाख रुपये का जीएसटी रिफंड देने के बदले दो लाख रुपये मांग रहे थे। कंपनी ने इसकी शिकायत विजिलेंस की हेल्पलाइन पर की, जिसके बाद डिप्टी कमिश्नर को रिश्वत की रकम लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया गया। विजिलेंस की टीम उससे विभूति खंड थाने में पूछताछ की।”
अन्य न्यूज रिपोर्ट्स को यहां पर देखा जा सकता है।
अधिक जानकारी के लिए हमने लखनऊ के चीफ रिपोर्टर राजीव बाजपेई से संपर्क किया। उन्होंने वीडियो को करीब एक साल पहले हुई घटना का बताया है।
अंत में हमने वीडियो को भ्रामक दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर एक विचारधारा से जुड़ी पोस्ट को शेयर करता है। यूजर ने प्रोफाइल पर खुद को उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया है।
निष्कर्ष : विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर के रिश्वत लेने के नाम से वायरल वीडियो को लेकर किया जा रहा दावा गलत है। असल में वायरल वीडियो हाल-फिलहाल में हुई घटना का नहीं, बल्कि करीब एक साल पहले हुई घटना का है।
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