नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। नेपाल में 26 अगस्त 2026 को आई भीषण बाढ़ आई थी। अचानक आई इस बाढ़ में घर, जानवर और मवेसी सभी बह गये। इस हादसे के कई वीडियो अब सामने आ रहे हैं। इसी से जोड़कर एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ लोग बालकनी में खड़े हैं और बाढ़ से बचने की कोशिश कर रहे हैं। तभी वह घर टूटकर गिर जाता है। इस वीडियो को नेपाल में आई बाढ़ का बताकर शेयर किया जा रहा है।
विश्वास न्यूज की पड़ताल में यह वायरल वीडियो फेक निकला। इसे एआई की मदद से बनाया गया है और अब गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
क्या हो रहा है वायरल?
इंस्टाग्राम यूजर ‘govt._job_search’ ने 28 अगस्त 2026 को वायरल वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, मौतों का आंकड़ा 400 के करीब; 290 भारतीय अब भी लापता…नेपाल में हाल के वर्षों की सबसे विनाशकारी बाढ ने भारी तबाही मचा दी है। इस प्राकृतिक आपदा में मौतों का आंकड़ा 400 के करीब पहुंच गया है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं, जिनमें करीब 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ के तेज बहाव में कई सड़कें और पुल तबाह हो गए हैं, जिससे राहत और बचाव अभियान में बड़ी मुश्किलें आ रही हैं। इसी बीच, तेजी से बढ़ते जलस्तर वाली एक झील ने नई चिंता पैदा कर दी है। इसके चलते डाउनस्ट्रीम इलाकों में एक और विनाशकारी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।”
पोस्ट के आर्काइव लिंक को यहां पर देखें।

पड़ताल
वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए हमने वीडियो को गौर से देखा। हमने पाया कि बालकनी में मौजूद लोग पूरे वीडियो में एक ही जगह पर एक ही मुद्रा में खड़े रहते और एक जैसा व्यवहार करते हैं। इतना ही नहीं, घर के गिरने पर भी वे लोग उसी तरह खड़े रहते हैं। ऐसे में हमें वीडियो के एआई से बने होने का संदेह हुआ।
हमने पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए एआई डिटेक्शन टूल का इस्तेमाल किया। हमने ‘Undetectable.ai’ पर वीडियो को सर्च किया। इस टूल ने वीडियो के एआई से बने होने की 59 फीसदी संभावना जताई।

वीडियो के बारे में अधिक पुष्टि के लिए हमने अपने सहयोगी ‘टीआईए’ (पूर्व में एमसीए) की पहल ‘डीपफेक्स एनालिसिस यूनिट’ (डीएयू) से संपर्क किया। उन्होंने हमारे साथ ‘Hive Moderation’ की एनालिसिस को शेयर किया, जिसमें वायरल वीडियो के एआई-निर्मित होने की करीब 97 फीसदी संभावना जताई गई।

डीएयू ने वीडियो के कीफ्रेम को ‘एआई ऑर नॉट‘ पर सर्च किया। इस टूल ने भी कीफ्रेम के एआई से बने होने की संभावना जताई।

डीएयू ने अपने एनालिसिस में हमें यह भी बताया कि वीडियो में कुछ लोग बालकनी में स्थिर खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि इमारत लगातार हिल रही है और गिरती जा रही है। आमतौर पर किसी इमारत के हिलने-डुलने पर उसमें मौजूद लोग भी हिलते हैं, हलचल करते हैं या फिर गिरते हैं। हालांकि, वायरल वीडियो में मौजूद लोग बिल्कुल स्थिर दिख रहे हैं। वीडियो फ्रेम में बाईं ओर सबसे आगे खड़े लोग इमारत गिरने की घटना को रिकॉर्ड करते हुए दिख रहे हैं, जबकि वे घर के काफी करीब खड़े हैं। वीडियो रिकॉर्ड कर रहे लोग इमारत गिरने पर भी खड़े ही रहते हैं। ऐसी खामियां अक्सर एआई वीडियो में देखने को मिलती हैं।
पड़ताल के दौरान हमें वायरल वीडियो Creativezack नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट पर मिला। वीडियो को 21 फरवरी 2026 को शेयर किया गया था। कैप्शन में वीडियो को एआई निर्मित बताया गया है।

क्या है संदर्भ?
‘Kathmandu Post’ की 31 अगस्त 2026 की एक न्यूज रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक, नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में भयंकर बाढ़ आई थी। इस बाढ़ के कारण न सिर्फ कई घर बह गए, बल्कि जानमाल का भी काफी नुकसान हुआ । मृतकों का आंकड़ा बढ़कर 903 तक पहुंच गया है, जबकि 4,247 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
‘The Himalayan Times’ पर 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक खबर के अनुसार, नेपाल की सेना रेस्क्यू के काम में लगी हुई है और लगातार बचाव कार्य कर रही है। अभी तक 10,451 लोगों का सफल रेस्क्यू किया जा चुका है। सेना ने हवाई मार्ग का उपयोग करते हुए 252 विदेशी नागरिकों और 3,344 नेपाली नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला है।
अंत में हमने वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर के अकाउंट को स्कैन किया। हमने पाया कि यूजर को इंस्टाग्राम पर छह सौ से अधिक लोग फॉलो करते हैं।
निष्कर्ष: विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि बाढ़ के कारण एक घर के टूटकर गिरने वाला वायरल वीडियो फेक है। असल में यह वीडियो नेपाल में आई बाढ़ का नहीं है। इसे एआई टूल्स का इस्तेमाल कर बनाया गया है।
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