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Fact Check: जमुई छेड़छाड़ केस की पीड़िता के नाम पर मेघालय की युवती का पुराना वीड‍ियो वायरल, FAKE है वायरल पोस्‍ट

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। बिहार के जमुई में 19 सितंबर 2026 की देर शाम नाबालिग छात्रा से छेड़खानी के बाद सोशल मीड‍िया पर कई फेक और भ्रामक पोस्‍ट की बाढ़ आ गई। अब सोशल मीड‍िया पर कई यूजर्स एक युवती का वीड‍ियो वायरल करते हुए उसे जमुई की घटना की पीड़िता बता रहे हैं। वायरल वीड‍ियो में एक युवती को इंसाफ मांगते हुए देखा जा सकता है।

विश्वास न्यूज ने व‍िस्‍तार से इसकी जांच की। वायरल पोस्‍ट फर्जी साब‍ित हुई। जांच में पता चला क‍ि मेघालय में रहने वाली जन्‍नत नाम की एक युवती का पुराना वीड‍ियो सोशल मीड‍िया पर जमुई की पीड़िता के नाम पर वायरल क‍िया जा रहा है।

क्या है वायरल पोस्ट?

फेसबुक यूजर ‘Atish Sharma’ ने 24 सितंबर 2026 को अपनी एक पोस्‍ट में दावा किया, “ये जमुई बिहार की पीड़िता लड़की है। वीडियो बना कर सपोर्ट मांग रही है,शेयर कीजिए ताकि इसकी बात जिम्मेदार लोगों तक पहुंच सके।”

वायरल पोस्‍ट के कंटेंट को यहां ज्‍यों का त्‍यों लिखा गया है। इसे सच मानकर कई सोशल मीडिया यूजर्स वायरल कर रहे हैं। पोस्‍ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।

पड़ताल

विश्वास न्‍यूज ने वायरल पोस्‍ट की सच्‍चाई जानने के ल‍िए सबसे पहले वायरल वीडियो के कई कीफ्रेम न‍िकाले। इसके बाद इन्‍हें गूगल लेंस पर सर्च किया गया। सर्च के दौरान हमें सबसे पुराना वीड‍ियो ‘sweet_zannat_12374’ नाम के एक इंस्‍टाग्राम हैंडल पर म‍िला। इसे 14 नवंबर 2025 को अपलोड क‍िया गया था, जबक‍ि ब‍िहार के जमुई में छात्रा के साथ छेड़छाड़ और ह‍िंसा 19 स‍ितंबर 2026 को हुई थी।

इस इंस्‍टाग्राम हैंडल को स्‍कैन करने पर हमें 16 नवंबर 2025 को अपलोड किया गया एक वीड‍ियो म‍िला। इसमें बताया गया क‍ि इस युवती का गलत वीड‍ियो वायरल करने वाले दो युवकों ने घर आकर उससे माफी मांगी। वायरल वीड‍ियो में द‍िख रही युवती के इंस्‍टाग्राम हैंडल स्‍कैन‍िंग में पता चला क‍ि वह मेघालय में रहती है।

विश्वास न्‍यूज ने जांच के दौरान जमुई पुल‍िस के आध‍िकार‍िक एक्‍स हैंडल को भी स्‍कैन क‍िया। वहां हमें 24 स‍ितंबर 2026 का एक प्रेस नोट म‍िला। इसमें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीड‍ियो का खंडन क‍िया गया है।

विश्वास न्‍यूज ने ‘दैन‍िक जागरण’, जमुई के संवाददाता संजय सिंह के साथ वायरल पोस्‍ट शेयर क‍िया। उन्‍होंने बताया, “वायरल वीड‍ियो में द‍िख रही युवती जमुई केस की पीड़‍िता नहीं है। यह एक फर्जी पोस्‍ट है।”

जमुई के पुल‍िस अधीक्षक विश्वजीत दयाल ने 21 स‍ितंबर 2026 को एक वीड‍ियो जारी करते हुए बताया था क‍ि किसी भी नाबालिग पीड़िता की पहचान, चेहरा या नाम सार्वजनिक करना या उससे जुड़ा वीडियो शेयर करना पॉक्सो एक्ट, आईटी एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत अपराध है। जमुई मामले में 120 सोशल मीडिया यूजर्स पर एफआईआर दर्ज की गई है।

क्या है संदर्भ?

‘बीबीसी ह‍िंदी’ की 24 सितंबर 2026 की एक खबर के अनुसार, 19 सितंबर की शाम 6:25 बजे छात्रा अपने एक दोस्त के साथ स्कूटी पर घूमने निकली थी। तकरीबन 20 मिनट बाद जब लड़की और उसका दोस्त मड़वा पहाड़ पर फोटो खींच रहे थे, तभी सात-आठ की संख्या में स्थानीय युवक आए और उन्होंने लड़की के साथ छेड़खानी और हिंसा की।

बीबीसी की खबर में आगे बताया गया है क‍ि 21 सितंबर की देर रात सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कुछ युवक लड़की से हिंसा करते हुए दिख रहे थे। पुलिस ने इस मामले में 21 सितंबर को तीन नाबालिग लड़कों को गिरफ्तार किया था, जबकि दो मुख्य अभियुक्तों, हरेराम यादव और नंदन यादव की गिरफ्तारी 22 सितंबर को एक एनकाउंटर के बाद हुई थी। इस दौरान नंदन को गोली भी लगी थी।

‘दैनिक जागरण’ की 24 सितंबर 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “पुलिस जांच में हरेराम का शराब तस्करी और अवैध बालू खनन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया है, जिसके बाद उसे पॉक्सो कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।”

जांच के अंत में मेघालय की युवती का पुराना वीड‍ियो गलत दावे के साथ वायरल करने वाले फेसबुक यूजर के अकाउंट की जांच की गई। इस यूजर को फेसबुक पर 8 हजार से ज्‍यादा लोग फॉलो करते हैं। यह अकाउंट मई 2021 में बनाया गया था।

निष्कर्ष: विश्वास न्‍यूज की जांच में वायरल पोस्‍ट फर्जी साब‍ित हुई। मेघालय की युवती के पुराने वीड‍ियो को जमुई केस की पीड़िता का बताकर झूठे दावे के साथ वायरल क‍िया गया है।

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