नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। उत्तर प्रदेश के बरेली में हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया के अलग- अलग प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर काफी संख्या में लोगों की भीड़ देखी जा सकती है। वहीं, इस भीड़ में ज्यादातर सभी लोगों ने धार्मिक टोपी और कुर्ता-पायजामा पहना हुआ है। वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि बरेली में हिंसा के बाद वहां से विशेष धर्म के लोगों ने शहर छोड़ना शुरू कर दिया है।
विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल किया जा रहा दावा फर्जी है। यह वीडियो बरेली शरीफ दरगाह में हुए आला हजरत के उर्स का है। इस साल का उर्स अगस्त में हुआ था, जिसमें लाखों लोग दूसरे देश और शहरों से आये थे, उसी उर्स के वीडियो को फर्जी दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।
क्या है वायरल पोस्ट में ?
फेसबुक यूजर सुनील सिंह ने 29 सितंबर को वायरल पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा, “इनका भूत तो बहुत जल्दी उतर गया बरेली के तौकीर रजा के बहकावे में आकर पूरे देश से मुसलमान बरेली में इकट्ठा हुए थे यूपी पुलिस अब कैमरों में पहचान कर कार्यवाही का आदेश दिया है तब ये सब बरेली छोड़कर भाग रहे हैं।”
पोस्ट के आर्काइव वर्जन को यहां देखें।

पड़ताल
अपनी पड़ताल को शुरू करते हुए सबसे पहले हमने गूगल लेंस के जरिए वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को सर्च किया। सर्च करने पर हमें यह वीडियो द लीडर हिंदी के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया हुआ मिला। यहां वीडियो को 21 अगस्त 2025 को अपलोड किया गया है। वहीं, साथ दी गई जानकारी के अनुसार, यह आला हजरत के उर्स का वीडियो है।
न्यूज सर्च किये जाने पर हमें अमर उजाला की 20 अगस्त 2025 की खबर मिली। खबर के अनुसार, “बरेली में आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी का 107वां उर्स बुधवार को अकीदत के माहौल में मुकम्मल हो गया। इसमें शिरकत करने के लिए देश-विदेश से लाखों जायरीन पहुंचे। बुधवार दोपहर 2:38 बजे कुल की रस्म अदा की गई। इसी के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन हो गया। इसके बाद जायरीन की वापसी का सिलसिला शुरू हुआ तो शहर में सड़कों पर जनसैलाब दिखा।
सर्च के दौरान 21 अगस्त 2025 को जागरण.कॉम की खबर मिली। जानकारी के अनुसार, “आला हजरत का तीन दिवसीय उर्स ए रजवी में ट्रेनों से सबसे ज्यादा यात्रियों का आवागमन हुआ। बरेली जंक्शन पर सामान्य दिनों में जहां 12 से 13 लाख रुपये के टिकट की बिक्री होती है, वहीं इन तीन दिनों में 18 से 20 लाख रुपये तक के टिकटों की बिक्री हुई। बरेली सिटी से दो उर्स स्पेशल ट्रेनों का संचालन कराया गया, जहां से रेलवे को 15 से 16 लाख रुपये अतिरिक्त आय हुई।”

वायरल वीडियो से जुड़ी पुष्टि के लिए हमने हमारे साथी दैनिक जागरण में बरेली के संपादकीय प्रभारी आशुतोष सिंह से संपर्क किया। उन्होंने हमें बताया “18, 19 और 20 अगस्त को बरेली में आला हजरत के उर्स का आयोजन हुआ था। उस समय रेलवे स्टेशन पर ऐसे दृश्य दिखे थे क्योंकि उस आयोजन में चार से छह लाख मुस्लिम समुदाय के लोग यहां आते हैं। तनाव के दौरान या उसके बाद बरेली या आसपास के स्टेशन पर ऐसा दृश्य कहीं भी देखने को नहीं मिला है। ऐसे में इस वीडियो को बरेली हिंसा से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।”
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की 3 अक्टूबर की खबर में बताया गया, 26 सितंबर को “आई लव मोहम्मद” पोस्टरों को लेकर प्रस्तावित विरोध रद्द होने के बाद जुमे की नमाज़ के बाद शहर के बीचोंबीच स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई और इस झड़प में कई लोग घायल हो गए। वहीं, पुलिस ने इस मामले में 10 एफआईआर दर्ज कर सैकड़ों अज्ञात लोगों को नामजद किया है और अब तक मौलाना तौकीर रज़ा ख़ान समेत उनके सहयोगियों व कुछ रिश्तेदारों सहित 70 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
बरेली हिंसा के बाद कई पुराने वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनका विश्वास न्यूज़ ने भी फैक्ट चेक किया है। हमारा फैक्ट चेक यहां पढ़ें।
अब बारी थी फर्जी पोस्ट को शेयर करने वाले फेसबुक यूजर की सोशल स्कैनिंग करने की। फेसबुक यूजर सुनील सिंह को पांच हजार लोग फॉलो करते हैं। वहीं, इस प्रोफाइल से विचारधारा प्रेरित पोस्ट शेयर की जाती हैं।
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