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Fact Check: केरल की सात साल पुरानी राजनीतिक झड़प की घटना को भड़काऊ सांप्रदायिक दावे के साथ किया जा रहा शेयर

नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में कुछ लोगों को घरों पर पत्थरबाजी करते हुए देखा जा सकता है। दावा किया जा रहा है कि यह घटना केरल की है, जहां मुस्लिम हिंदुओं के घरों को निशाना बनाकर पत्थरबाजी कर रहे हैं, ताकि डरा-धमकाकर उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सके।

विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को गलत पाया। वायरल हो रहा वीडियो केरल का ही है, लेकिन पुरानी घटना का है और इसका हिंदू-मुस्लिम जैसे किसी भी विवाद से कोई लेना-देना नहीं है। केरल के नदापुरम में 2016 में इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के कार्यकर्ता की हत्या के बाद कांग्रेस, बीजेपी और सीपीआई-एम समर्थकों के घरों पर हमला किया गया था। इसी राजनीतिक झड़प के वीडियो को भड़काऊ सांप्रदायिक दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।

क्या है वायरल?

सोशल मीडिया यूजर ‘Vijay Mahto’ ने वायरल वीडियो (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा है, “Muslim’s throwing stones on Hindu bungalows in Kerala threatening them to vacate, same like Kashmir model.”

(“केरल में मुस्लिम हिंदुओं के बंगलों पर पत्थरबाजी करते हुए उन्हें उनका घर छोड़ने के लिए डरा रहे हैं। बिल्कुल कश्मीर जैसा मॉडल।”)

कई अन्य यूजर्स ने इस वीडियो को समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया है। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भी कई यूजर्स ने इस वीडियो को समान दावे के साथ शेयर किया है।

पड़ताल

वायरल वीडियो के की-फ्रेम्स को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें ‘मनोरमा न्यूज’ के आधिकारिक यू-ट्यूब चैनल पर 15 अगस्त 2016 को अपलोड किया हुआ वीडियो बुलेटिन मिला, जिसमें केरल के नदापुरम में करीब 50 से अधिक घरों पर हमले का जिक्र है।

स्पष्ट है कि वायरल हो रहा वीडियो काफी पुराना है। वीडियो से मिली जानकारी के आधार पर की-वर्ड सर्च में ‘द न्यूज मिनट’ की वेबसाइट पर 13 अगस्त 2016 को प्रकाशित रिपोर्ट मिली, जिसमें इस घटना का विवरण है। दी गई जानकारी के मुताबिक, “इंडियन यूनियन ऑफ मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के 20 वर्षीय कार्यकर्ता असलम की हत्या कर दी गई थी।”

द न्यूज मिनट की वेबसाइट पर 13 अगस्त 2016 को प्रकाशित तस्वीर

रिपोर्ट के मुताबिक, “असलम सीपीआई-एम कार्यकर्ता शिबिन की हत्या का आरोपी था, जिसे बाद में निचली अदालत से बरी कर दिया गया था।” साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि नदापुरम राजनीतिक हत्या और हिंसा के लिए कुख्यात रहा है, जहां 2001 के बाद से ऐसी पांच हत्याएं हो चुकी हैं।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की 18 अगस्त 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, “राजस्व विभाग के अधिकारी नदापुरम में घरों को हुए नुकसान के मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे, जहां आईयूएमएल की कार्यकर्ता की हत्या के बाद व्यापक हिंसा में कई घरों को नुकसान पहुंचाया गया था।”

विभाग के मुताबिक, असलम की मौत के बाद करीब 47 घरों पर हमला हुआ था, जिसमें से 40 घर थुनेरी और सात घर नदापुरम के थे।

वायरल वीडियो को लेकर विश्वास न्यूज केरल के स्थानीय पत्रकार और फैक्ट चेक फिरोज खान से संपर्क किया। उन्होंने पुष्टि करते हुए बताया कि वायरल वीडियो कई साल पुरानी घटना का है और इसमें हिंदू-मुस्लिम जैसा कुछ भी नहीं था। उन्होंने कहा, “यह राजनीतिक हिंसा थी, जिसमें आईयूएमएल की कार्यकर्ता की हत्या के बाद अन्य दलों के समर्थकों के घरों को निशाना बनाया गया था।”

इससे पहले एक अन्य वायरल वीडियो को शेयर कर यह दावा किया गया था कि केरल में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया गया है। विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को गलत पाया था। वायरल दावे की जांच करती फैक्ट चेक रिपोर्ट को यहां पढ़ा जा सकता है।

वायरल वीडियो को फेक व भड़काऊ सांप्रदायिक दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर को फेसबुक पर करीब डेढ़ हजार लोग फॉलो करते हैं।

निष्कर्ष: केरल के नदापुरम में आईयूएमएल पार्टी के कार्यकर्ता की हत्या के बाद अन्य दलों के समर्थकों के घरों को निशाना बनाकर किए गए हमले की पुरानी घटना के वीडियो को सांप्रदायिक रंग देकर शेयर किया जा रहा है। केरल में हिंदुओं के घरों को मुस्लिमों के निशाना बनाए जाने के दावे के साथ वायरल हो रहा वीडियो राजनीतिक हिंसा और झड़प से संबंधित है, जिसमें आईयूएमएल पार्टी समर्थकों ने अन्य दलों के समर्थकों के घरों को निशाना बनाया था।

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